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मई में चौथी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ

Petrol and diesel became expensive for the fourth time in May, increasing the burden on the common man's pocket.

Emran Khan by Emran Khan
May 25, 2026
in अन्य, समाचार
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मई में चौथी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ
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देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मई महीने में चौथी बार ईंधन महंगा होने से परिवहन, खेती और रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। तेल कंपनियों ने 25 मई से पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य पदार्थों, सब्जियों, फलों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?

ईंधन की कीमत बढ़ने से सबसे पहले परिवहन खर्च बढ़ता है। ट्रक, टेम्पो और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाले सामान महंगे हो जाते हैं। इसका असर सीधे बाजार में दिखाई देता है, जहां सब्जियों, राशन और फल-सब्जियों के दाम बढ़ने लगते हैं।

इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन भी महंगा हो सकता है। बस, ऑटो और टैक्सी सेवाओं के किराए में इजाफा होने की संभावना है। कई शहरों में स्कूल बसों के शुल्क पर भी असर पड़ सकता है।

खेती-किसानी पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। किसानों को ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और आने वाले समय में अनाज तथा कृषि उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?

ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच हालात बिगड़ने के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

कुछ समय पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, लेकिन हालिया तनाव के बाद इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है।

तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से कीमतें स्थिर रखे जाने के कारण उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया।

कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई स्तरों से गुजरने के बाद तय होती हैं। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत निर्धारित होती है। इसके बाद रिफाइनरियों में उसे शुद्ध कर पेट्रोल और डीजल में बदला जाता है।

रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों का मार्जिन जोड़ने के बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है। इसके अलावा डीलर कमीशन भी शामिल होता है। अंत में राज्य सरकारें अपने-अपने हिसाब से वैट या सेल्स टैक्स लगाती हैं।

इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग होती हैं। उदाहरण के तौर पर मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता में ईंधन की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।

लंबे समय तक स्थिर रहे थे दाम

देश में मार्च 2024 के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ था। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी।

हालांकि तकनीकी रूप से तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से रोजाना कीमतों में बदलाव कर सकती हैं, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक कारणों से लंबे समय तक दाम स्थिर रखे गए थे।

तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पर लगातार बढ़ती लागत का दबाव बढ़ रहा था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। यही कारण है कि अब कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया।

सरकार ने पहले घटाई थी एक्साइज ड्यूटी

कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और ईंधन की कीमतें नियंत्रित रहें।

सरकार के इस कदम से कुछ समय तक कीमतों में स्थिरता बनी रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी ने एक बार फिर दबाव बढ़ा दिया है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में और वृद्धि हो सकती है।

ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने चुनौती होगी कि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ कम से कम पड़े। फिलहाल बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल-डीजल की नई कीमतों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

 

Tags: CNG Price HikePetrol. Diseal
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