देश के औषधि क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से 9वां फार्मामेड 2026 सम्मेलन 27 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग द्वारा PHD Chamber of Commerce and Industry के सहयोग से आयोजित यह एक दिवसीय कार्यक्रम फार्मा उद्योग के दिग्गजों, नीति निर्माताओं और नियामकों को एक मंच पर लाएगा।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम “समान स्वास्थ्य सेवा: विकसित भारत के प्रत्येक नागरिक तक पहुंच” रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में दवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और पहुंच को बेहतर बनाने के लिए नीति और उद्योग के बीच संवाद को मजबूत करना है।
सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। इनमें भारत के औषधि क्षेत्र को “मात्रा-आधारित” से “मूल्य-आधारित” वैश्विक केंद्र में बदलने की रणनीति, नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा, बायोलॉजिक्स और उन्नत उपचार शामिल हैं। इसके साथ ही दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियामक सामंजस्य, वैश्विक मानकों (GMP) का पालन और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर भी जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में Central Drugs Standard Control Organization द्वारा हाल के नियामकीय बदलावों, अनुमोदन के बाद के परिवर्तनों (PAC) और अनुपालन प्रक्रियाओं पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, सक्रिय औषधि संघटक (API) पर निर्भरता, नकली दवाओं की रोकथाम और घरेलू विनिर्माण को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
सम्मेलन का एक प्रमुख फोकस दवाओं तक अंतिम व्यक्ति की पहुंच सुनिश्चित करना भी है। इसमें डिजिटल हेल्थ, ई-फार्मेसी ढांचे, और सस्ती व सुलभ दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
इस उच्च स्तरीय आयोजन में कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी, जिनमें Vinod K. Paul, Rajeev Singh Raghuvanshi और US Food and Drug Administration के भारत कार्यालय के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा Serum Institute of India, Cipla, Mankind Pharma और Tata 1mg जैसे प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ भी अपने विचार साझा करेंगे।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारत वैश्विक फार्मा क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। सरकार “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के तहत औषधि और चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
फार्मामेड 2026 से उम्मीद की जा रही है कि यह नीति और उद्योग के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा, जिससे भारत न केवल दुनिया का प्रमुख दवा आपूर्तिकर्ता बने, बल्कि गुणवत्ता और नवाचार के मामले में भी वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सके।

