PMFAI ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan से मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) की “रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन” (RDP) की मांगों को खारिज करने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि 20 साल के मौजूदा पेटेंट पीरियड के बाद अतिरिक्त डेटा प्रोटेक्शन देने से घरेलू एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री कमजोर होगी और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
27 अप्रैल 2026 को की गई 
एसोसिएशन ने RDP को “TRIPS प्लस” उपाय बताते हुए चेतावनी दी कि इससे जेनेरिक पेस्टिसाइड्स की एंट्री में देरी होगी। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें सस्ते विकल्प समय पर नहीं मिल पाएंगे। साथ ही, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए बाजार में प्रवेश मुश्किल हो जाएगा, जिससे प्रतिस्पर्धा घट सकती है।
PMFAI ने यह भी कहा कि भारत, जो वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल एक्सपोर्टर है, उसके निर्यात पर भी असर पड़ सकता है। अतिरिक्त रेगुलेटरी बाधाएं पेटेंट-एक्सपायर हो चुके मॉलिक्यूल्स के निर्यात को सीमित कर सकती हैं।
एसोसिएशन ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा 20 साल का पेटेंट पीरियड इनोवेटर्स के लिए पर्याप्त है। कमेटी ने यह भी माना कि भारत का बड़ा कृषि बाजार विदेशी निवेश और इनोवेशन को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है, भले ही अतिरिक्त डेटा एक्सक्लूसिविटी न दी जाए।
PMFAI के अध्यक्ष Pradeep Dave ने कहा, “भारत जेनेरिक एग्रोकेमिकल्स के उत्पादन और आपूर्ति में वैश्विक लीडर है। नीतियों का उद्देश्य जेनेरिक्स को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि उन्हें रोकना।”
एसोसिएशन ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक एग्रोकेमिकल बाजार का लगभग 90% हिस्सा जेनेरिक उत्पादों का है। PMFAI के अनुसार, पश्चिमी MNCs द्वारा पेटेंट का दुरुपयोग भी किया जा रहा है, जिससे भारत में कई उत्पाद लॉन्च ही नहीं होते।
अंत में, PMFAI ने चेतावनी दी कि RDP लागू करना “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहलों के खिलाफ जाएगा और सरकार से इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए बैठक की मांग की है।