Droupadi Murmu ने महाराष्ट्र के नागपुर स्थित All India Institute of Medical Sciences Nagpur के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और नवोदित डॉक्टरों को संबोधित करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण को सर्वोपरि बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकती।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने चिकित्सा पेशे को केवल एक करियर नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का पवित्र माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर केवल बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि मरीजों के मन में आशा और विश्वास भी जगाता है। डॉक्टरों की सहानुभूतिपूर्ण सलाह मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक शक्ति प्रदान करती है, जो उपचार प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि डॉक्टरों को अक्सर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, लेकिन हर परिस्थिति में उन्हें संवेदनशीलता और धैर्य बनाए रखना चाहिए। साथ ही, उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से भी अपील की कि वे चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान का भाव रखें, जिससे डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध मजबूत बना रहे।
देश के विकास में स्वास्थ्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों का स्वस्थ होना राष्ट्र की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना शामिल है। इससे न केवल बेहतर इलाज की सुविधा बढ़ी है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि स्थापना के कुछ ही वर्षों में एम्स नागपुर ने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने इसे उत्कृष्टता का उभरता हुआ केंद्र बताते हुए कहा कि यह संस्थान देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ सेवाएं और उन्नत शोध जैसी तकनीकों ने चिकित्सा जगत में नई संभावनाएं खोली हैं। इन तकनीकों का उपयोग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता को दूर करने में किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने युवा डॉक्टरों को आजीवन सीखने की भावना अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और नवाचार ही प्रगति का आधार हैं। चिकित्सा विज्ञान में नए समाधान खोजने की ललक उन्हें न केवल बेहतर डॉक्टर बनाएगी, बल्कि समाज सेवा के अधिक अवसर भी प्रदान करेगी।
समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने सभी स्नातक छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से समाज को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित प्रयासों से ही भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल कर सकेगा।

