ֆ:यह फ्लोरल कैलेंडर “पंजाब राज्य की उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में सजावटी फसलों की सांस्कृतिक क्रियाएं” विषय पर आधारित है, जिसमें विभिन्न फूलों की फसलों की मासिक देखभाल और खेती की विधियों को संक्षिप्त रूप से दर्शाया गया है। इसके साथ सुंदर चित्रों को भी जोड़ा गया है, जिससे यह शौकिया बागवानों और फूल प्रेमियों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।§֍:बागवानी को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम§ֆ:इस कैलेंडर का उद्देश्य सामान्य नागरिकों, शौकिया माली, और छोटे स्तर पर व्यवसायिक फूल उत्पादन करने वालों को पूरे वर्ष फूलों की खेती की सही जानकारी देना है। इसमें बताए गए मासिक उपाय बागवानी को अधिक व्यवस्थित और सफल बनाने में मदद करेंगे।
PAU के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल, अनुसंधान निदेशक डॉ. एएस ढत्त, और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. एमएस भुल्लर ने इस पहल की सराहना की और सुझाव दिया कि इस कैलेंडर को स्थानीय भाषा में भी प्रकाशित किया जाए, जिससे यह राज्य के किसानों, शहरी बागवानी प्रेमियों और आम लोगों तक अधिक प्रभावी रूप से पहुंच सके।
§֍:देशभर के कृषि विशेषज्ञ रहे मौजूद§ֆ:इस कार्यक्रम में कृषि और बागवानी क्षेत्र के कई प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. सुधाकर पांडे (एडिशनल डायरेक्टर जनरल – फूल/सब्जी/मसाले/औषधीय पौधे), डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल (कुलपति, डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय), डॉ. केवी प्रसाद (निदेशक, फ्लोरीकल्चरल रिसर्च निदेशालय), और वरिष्ठ पुष्पविज्ञानी डॉ. एनके डडलानी प्रमुख रहे।§ֆ:PAU द्वारा तैयार किया गया यह फ्लोरल कैलेंडर एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार शैक्षणिक उपकरण है जो आम जनता को सजावटी पौधों की खेती और देखभाल में मार्गदर्शन प्रदान करेगा। यह पहल निश्चित रूप से पंजाब में फूलों की खेती और बागवानी संस्कृति को नई दिशा देगी और ग्रामीण से लेकर शहरी नागरिकों तक फूलों के प्रति रुचि को बढ़ावा देगी।§पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU), लुधियाना के फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग विभाग द्वारा तैयार किया गया एक अनोखा ‘फ्लोरल कैलेंडर’ हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में आयोजित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) ऑन फ्लोरीकल्चर की 33वीं वार्षिक बैठक के दौरान जारी किया गया।

