देशभर में रबी विपणन सत्र 2026-27 के तहत गेहूं की सरकारी खरीद आज यानी 1 अप्रैल 2026 से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने इस बार किसानों के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी को दर्शाता है। इस फैसले से देश के करोड़ों किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से खरीद प्रक्रिया को सुचारु और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। विभिन्न राज्यों में खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों से सीधे गेहूं खरीदा जाएगा। इसके साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
खरीद प्रक्रिया मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में तेज़ी से चलेगी। इन राज्यों में मंडियों और खरीद केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की देरी न हो।
इस बार भी सरकार ने ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करने की व्यवस्था जारी रखी है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य समय पर मिल पाता है। अधिकारियों के अनुसार, खरीद के 48 से 72 घंटे के भीतर किसानों के खाते में राशि भेजने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में बढ़ोतरी और समय पर खरीद से किसानों को अपनी लागत निकालने और बेहतर मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी। इससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता आएगी और किसानों का मनोबल भी बढ़ेगा। साथ ही, यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि खरीद केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं जैसे पेयजल, छाया, साफ-सफाई और तौल व्यवस्था उपलब्ध रहे। इसके अलावा, गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है, ताकि किसानों की फसल को अनावश्यक रूप से अस्वीकार न किया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण गेहूं उत्पादन अच्छा होने की संभावना है। ऐसे में सरकारी खरीद का दायरा बढ़ सकता है और रिकॉर्ड स्तर पर खरीद होने की उम्मीद है। इससे सरकार के भंडार भी मजबूत होंगे और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत जरूरतमंदों को अनाज उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जैसे मंडियों में भीड़, परिवहन की दिक्कतें और भंडारण क्षमता की सीमाएं। लेकिन सरकार का दावा है कि इन सभी मुद्दों से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
कुल मिलाकर, रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं खरीद की शुरुआत किसानों के लिए राहत भरी खबर है। MSP में बढ़ोतरी, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और समय पर भुगतान की गारंटी से यह उम्मीद की जा रही है कि किसानों की आय में सुधार होगा और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।

