लोक सभा का सातवां सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस सत्र में उच्च कार्य-उत्पादकता और व्यापक विधायी गतिविधियों के चलते इसे प्रभावी और सार्थक माना जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान सदन की कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही, जो संसदीय कार्यों के प्रति गंभीरता और सक्रियता को दर्शाती है।
31 बैठकें, 151 घंटे से अधिक कामकाज
लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि 28 जनवरी 2026 से शुरू हुए इस सत्र में कुल 31 बैठकें आयोजित की गईं, जो मिलाकर 151 घंटे 42 मिनट तक चलीं। इस दौरान महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ कई विधायी कार्य संपन्न किए गए।
सत्र की शुरुआत द्रौपदी मुर्मू के संसद के दोनों सदनों को संयुक्त संबोधन से हुई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लगभग 2 घंटे 46 मिनट तक चर्चा हुई।
बजट पर गहन चर्चा
वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर सदन में लगभग 13 घंटे तक सामान्य चर्चा हुई, जिसमें 63 सांसदों ने भाग लिया। यह चर्चा देश की आर्थिक दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर व्यापक विचार-विमर्श का प्रतीक रही।
इसके अलावा, विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर 16 से 18 मार्च तक चर्चा के बाद उन्हें पारित किया गया। इसके साथ ही विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक भी क्रमशः 18 और 25 मार्च को पारित किए गए।
महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तृत विमर्श
सत्र के दौरान कुल 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 विधेयक पारित किए गए। इनमें वित्त विधेयक 2026, औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं।
विशेष रूप से संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, संघ राज्यक्षेत्र विधि संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 पर 21 घंटे 27 मिनट तक चर्चा हुई, जिसमें 131 सांसदों ने भाग लिया। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका, लेकिन इस पर हुई व्यापक चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाती है।
जनहित के मुद्दों पर सक्रियता
सत्र के दौरान सांसदों ने जनहित के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। शून्यकाल में 326 लोक महत्व के मामले उठाए गए, जबकि नियम 377 के तहत 650 मुद्दे प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा 126 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए गए, जो सरकार की जवाबदेही को दर्शाते हैं।
समितियों और चर्चाओं की अहम भूमिका
विभागीय संसदीय स्थायी समितियों ने इस दौरान 73 रिपोर्ट प्रस्तुत कीं और कुल 2089 दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए। साथ ही “वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त करने के प्रयास” विषय पर 6 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, जिसमें 36 सांसदों ने भाग लिया।
बहुभाषीय भागीदारी और तकनीकी उपलब्धि
इस सत्र की एक खास उपलब्धि यह भी रही कि सांसदों ने 18 भारतीय भाषाओं में 181 वक्तव्य दिए, जिनका एक साथ अनुवाद सफलतापूर्वक किया गया। इसके अलावा देश की वैज्ञानिक उपलब्धि के तहत 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल करने की जानकारी भी सदन को दी गई।
कुल मिलाकर, 18वीं लोकसभा का सातवां सत्र उच्च उत्पादकता, व्यापक चर्चा और प्रभावी विधायी कार्यों के लिए यादगार रहा, जिसने लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूत किया।

