किसानों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने और जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करते हुए हजारों मामलों में कड़ी कार्रवाई की है, जिससे किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
सरकार ने उर्वरकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आवश्यक वस्तु घोषित किया है और उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के माध्यम से इसके वितरण और बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। इसके तहत राज्य सरकारों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है, जबकि केंद्र सरकार नियमित रूप से इन कार्रवाइयों की निगरानी करती है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से अब तक प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 4.66 लाख से अधिक छापेमारी की गई है। इस दौरान 16,246 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6,800 से अधिक लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए और 821 प्राथमिकी दर्ज की गईं। फरवरी 2026 में भी जमाखोरी के मामलों पर कार्रवाई जारी रही, जिसमें 28 नोटिस जारी किए गए और दो लाइसेंस रद्द किए गए। ये कदम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सरकार उर्वरक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं कर रही है।
सरकार का कहना है कि इन सख्त उपायों के बावजूद किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह संतोषजनक बनी हुई है। रबी सीजन 2025-26 के दौरान यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस जैसे प्रमुख उर्वरकों की आपूर्ति मांग से अधिक रही है। उदाहरण के तौर पर, यूरिया की मांग 191.72 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि उपलब्धता 249.17 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई। इसी तरह डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस उर्वरकों की भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सरकार यूरिया सब्सिडी योजना भी चला रही है। इसके तहत 45 किलोग्राम के यूरिया बैग का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 242 रुपये निर्धारित किया गया है। बाजार मूल्य और वास्तविक लागत के बीच का अंतर सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन किया जाता है, जिससे किसानों को राहत मिलती है।
इसके अलावा, फॉस्फेट और पोटैशियम (P&K) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना का क्रियान्वयन भी जारी है। इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी दरों को समय-समय पर समायोजित किया जाता है, ताकि किसानों को किफायती दरों पर उर्वरक मिलते रहें।
सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए खरीफ 2025 और रबी 2025-26 सीजन के लिए विशेष प्रावधान भी किए हैं। इसके तहत डीएपी और टीएसपी जैसे उर्वरकों पर 3,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन तक अतिरिक्त सहायता दी जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ सीधे किसानों पर नहीं पड़ता।
विशेषज्ञों का मानना है कि उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर उचित मूल्य पर उर्वरक मिल सकेंगे। साथ ही, पर्याप्त आपूर्ति और सब्सिडी योजनाएं किसानों की लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

