दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने छह ताप विद्युत संयंत्रों पर करीब 61.85 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) लगाया है। यह कार्रवाई बायोमास सह-दहन (Biomass Co-firing) के अनिवार्य मानदंडों का पालन न करने पर की गई है।
आयोग के अनुसार, इन संयंत्रों को कोयले के साथ कम से कम 5 प्रतिशत धान के भूसे से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट का उपयोग करना अनिवार्य था। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए न्यूनतम 3 प्रतिशत सह-दहन का लक्ष्य भी ये संयंत्र पूरा नहीं कर सके। यह नियम 2023 में इसलिए लागू किया गया था ताकि पराली जलाने की घटनाओं को कम किया जा सके और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
जिन ताप विद्युत संयंत्रों पर जुर्माना लगाया गया है, उनमें पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रमुख प्लांट शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 33.02 करोड़ रुपये का जुर्माना तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (पंजाब) पर लगाया गया है। इसके अलावा पानीपत, दीनबंधु छोटू राम, राजीव गांधी और गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट्स (हरियाणा और पंजाब) तथा हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन (उत्तर प्रदेश) पर भी विभिन्न राशियों का दंड लगाया गया है।
इस मामले में आयोग ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के साथ मिलकर एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने संयंत्रों के प्रदर्शन डेटा, अनुपालन रिपोर्ट और उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों की विस्तृत समीक्षा की। जांच में पाया गया कि संयंत्रों ने नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।
आयोग ने सभी संबंधित संयंत्रों को निर्देश दिया है कि वे 15 अप्रैल 2026 तक जुर्माने की राशि जमा कर इसका प्रमाण प्रस्तुत करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमास सह-दहन पराली प्रबंधन का एक प्रभावी विकल्प है। इससे फसल अवशेषों को जलाने की बजाय ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रदूषण कम होता है और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलते हैं।
CAQM ने दोहराया है कि इस तरह के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। आयोग का कहना है कि वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और भविष्य में भी उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
कुल मिलाकर, यह कदम न केवल प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा संदेश देता है।

