बिहार में Papaya Farming किसानों के लिए क्यों बन रही है फायदे का सौदा?
पिछले कुछ वर्षों में बिहार के किसानों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां अधिकांश ...
पिछले कुछ वर्षों में बिहार के किसानों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां अधिकांश ...
बछवाड़ा, बेगूसराय (बिहार) | किसान: अमरदीप चौधरी | फसल: पपीता (Papaya Farming) खेती को लोग अक्सर मेहनत का काम कहते हैं — और यह सच भी है। लेकिन जब मेहनत के साथ सही सोच और थोड़ी हिम्मत मिल जाए, तो वही खेती जिंदगी बदल देती है। बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड की चिरंजीवीपुर पंचायत, वार्ड नंबर 3 के रहने वाले किसान अमरदीप चौधरी की कहानी कुछ ऐसी ही है। आज अमरदीप की Papaya Farming पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। उनके Papaya Farm से हर दो दिन में 2 से 3 क्विंटल पपीता निकलता है, मंडी में ₹3,000 से ₹4,000 प्रति क्विंटल का भाव मिलता है और महीने के अंत में जेब में पारंपरिक खेती से चार गुना तक ज्यादा पैसा होता है। लेकिन यह सफर आसान नहीं था। पहले क्या था? — गेहूं-मक्का, मेहनत ज्यादा, कमाई कम कुछ साल पहले तक अमरदीप भी बिहार के अधिकतर किसानों की तरह गेहूं और मक्का की खेती करते थे। हर सीजन में खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी का खर्च होता था। फसल तैयार होती थी, मंडी जाते थे — लेकिन हाथ में जो बचता था, वो परिवार चलाने के लिए बस काफी होता था, आगे बढ़ने के लिए नहीं। "लागत निकालने के बाद कुछ खास बचता नहीं था। लगा कि कुछ तो बदलना होगा।" — अमरदीप चौधरी यही बेचैनी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी। इंटरनेट ने बदली सोच — मोबाइल से मिली Papaya Farming की राह अमरदीप पढ़े-लिखे किसान हैं। उन्होंने अपने मोबाइल फोन को सिर्फ कॉल करने तक सीमित नहीं रखा। YouTube, कृषि वेबसाइट्स और ऑनलाइन किसान समूहों से उन्होंने आधुनिक खेती की जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उन्हें पपीते की व्यावसायिक खेती (Commercial Papaya Farming) के बारे में पता चला। देश के कई हिस्सों में किसान Papaya Farming के जरिए अच्छा मुनाफा कमा रहे थे। उन्होंने गहराई से अध्ययन किया — पौधों की देखभाल, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, बाजार की मांग, सब कुछ। ...

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