तेलंगाना सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए नई योजना की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक रासायनिक खेती से हटाकर टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर प्रेरित करना है। सरकार आने वाले कृषि वर्ष में राज्य के विभिन्न हिस्सों में 489 क्लस्टर विकसित करेगी, जो कुल 61,125 एकड़ क्षेत्र में फैले होंगे। इन क्लस्टरों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
इस योजना के तहत 61,125 किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे बिना रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के खेती कर सकें। हर क्लस्टर में दो “कृषि सखी” नियुक्त की जाएंगी, जो किसानों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ उन्हें नई तकनीकों को अपनाने में मदद करेंगी। इन कृषि सखियों को सरकार की ओर से हर महीने 5,000 रुपये का मानदेय भी दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राज्य के कृषि, विपणन और सहकारिता मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 42 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसका औपचारिक शुभारंभ 20 मार्च को सिद्धिपेट जिले के नर्मेट्टा में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनना चाहता है और यह योजना उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
इसी क्रम में, मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी 22 मार्च को नर्मेट्टा में ताड़ के तेल प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही वे किसानों के लिए ‘रायतु भरोसा योजना’ के तहत 9,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी जारी करेंगे। यह राशि किसानों को आगामी खरीफ सीजन से पहले बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मदद करेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस योजना के तहत 18,000 करोड़ रुपये किसानों को दिए जा चुके हैं और जल्द ही अगली किस्त भी जारी की जाएगी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम होगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग चला रही है। इस मिशन के तहत देशभर में 1 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए 2,481 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर इस योजना को लागू करते हुए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, तेलंगाना सरकार की यह पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी मजबूत बनाएगी।

