हैदराबाद: राज्य में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना स्टेट एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PJTSAU) और कृषि विभाग ने मिलकर 30,000 सॉइल हेल्थ वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग देने की योजना शुरू की है। इसके तहत सोमवार को पहले बैच में 1,200 वॉलंटियर्स की ट्रेनिंग की शुरुआत हुई।
कृषि विभाग के सचिव सुरेंद्रमोहन ने कहा कि सरकार सभी किसानों को Soil Health Card उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “मिट्टी ही किसान की असली पूंजी है और उसकी सेहत अच्छी होगी तभी बेहतर उत्पादन संभव है।” उन्होंने वॉलंटियर्स से अपील की कि वे अपने-अपने गांवों में कम से कम 10 किसानों को मिट्टी की जांच और उसके महत्व के बारे में जागरूक करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रोफेसर एल्डास जनैया ने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। इससे न केवल फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि “मिट्टी की सेहत को बचाना अब एक आंदोलन का रूप लेना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ जमीन मिल सके।” उन्होंने यह भी बताया कि असंतुलित खेती के तरीकों से हवा, पानी और जैव विविधता पर भी खतरा बढ़ रहा है।
यह पहल पब्लिक गवर्नेंस प्रोग्रेस प्लान के तहत चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत सभी वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग के बाद पहचान पत्र भी दिए जाएंगे।
इस कदम से किसानों में जागरूकता बढ़ने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

