मध्यप्रदेश के रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होने वाला राष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला किसानों के लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं होगा। इस तीन दिवसीय आयोजन में फसल बीमा, कृषि ऋण, कृषि अवसंरचना, उन्नत बीज-उर्वरक, जैविक प्रमाणन, एफपीओ-मार्केटिंग और भविष्य के “कृषि रोडमैप” से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरपंचों के साथ वर्चुअल संवाद में इस मेले को “कृषि महाकुंभ” बताते हुए गांव-गांव से अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि सरपंच इसे मिशन के रूप में लें, तो यह आयोजन किसानों का एक बड़ा लोक-उत्सव बन सकता है।
मंत्री ने इस मेले को किसानों के लिए “जीवंत विश्वविद्यालय” की संज्ञा दी। उनके अनुसार, इन तीन दिनों में किसान आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक, जैविक खेती और एफपीओ आधारित मार्केटिंग जैसे विषयों को नजदीक से समझ सकेंगे। साथ ही बीमा, ऋण और कृषि अवसंरचना से जुड़े व्यावहारिक समाधान भी उन्हें यहीं मिलेंगे, जिससे वे भविष्य की सुरक्षित और समृद्ध खेती की दिशा तय कर सकेंगे।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सेक्शन होगा, जहां बीमा कंपनियां मौके पर ही किसानों को फसल बीमा पॉलिसी प्रदान करेंगी। “किसान पाठशाला”, AIDE ऐप और “कृषि रक्षक” पोर्टल के माध्यम से किसानों को प्रीमियम, क्लेम प्रक्रिया, नुकसान की रिपोर्टिंग और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाओं की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी। विशेषज्ञ किसानों की शंकाओं का मौके पर ही समाधान करेंगे।
कृषि ऋण और वित्तीय सहायता के क्षेत्र में भी यह मेला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), टर्म लोन, संयुक्त देयता समूह (JLG) और स्वयं सहायता समूह (SHG) ऋण जैसी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कृषि अवसंरचना कोष के तहत वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयों और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता पर भी विस्तृत मार्गदर्शन मिलेगा। कई बैंकों द्वारा ऑन-द-स्पॉट ऋण स्वीकृति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को तुरंत लाभ मिल सके।
उन्नत बीज और उर्वरक के क्षेत्र में भी मेला किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। सरकारी और निजी कंपनियां उच्च उत्पादकता वाली किस्मों, हाइब्रिड बीज और रिसर्च-सीड का प्रदर्शन करेंगी। वहीं पौधा किस्म संरक्षण एवं किसान अधिकार प्राधिकरण किसानों को बीजों और पौधों की किस्मों पर उनके अधिकारों तथा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देगा।
उर्वरक कंपनियां जैव-उर्वरक, माइक्रो-न्यूट्रिएंट और संतुलित पोषण प्रबंधन के जरिए मृदा स्वास्थ्य सुधार पर जोर देंगी। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग के व्यावहारिक मॉडल दिखाए जाएंगे, जिससे लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि संभव हो सके।
मेले में जैविक और प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। “शुद्ध माटी, स्वस्थ फसल” के संदेश के साथ किसानों को जैविक खाद, कम्पोस्ट, गोबर आधारित पोषण और जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया समझाई जाएगी। साथ ही एफपीओ, सहकारी संस्थाओं और NAFED तथा NCCF के माध्यम से सीधे बाजार से जुड़ने के अवसर भी बताए जाएंगे।
कुल मिलाकर, रायसेन का यह कृषि मेला किसानों को “कम लागत, अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार” का मार्ग दिखाने वाला साबित होगा। हजारों किसान इस आयोजन में शामिल होकर आधुनिक खेती की नई दिशा प्राप्त करेंगे, जो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

