ֆ:डीएम ने कहा कि किसी भी ग्राम प्रधान के खिलाफ जांच से कम से कम 72 घंटे पूर्व एक लिखित नोटिस जारी किया जाए, जिसमें जांच की तारीख, समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख हो। इस नोटिस के माध्यम से प्रधान, पंचायत सचिव, शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित पक्षों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा। यदि कोई पक्ष अनुपस्थित रहता है तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।§ֆ:डीएम ने निर्देश दिया कि नोटिसों की तामील बीडीओ के माध्यम से संबंधित पक्षों तक सुनिश्चित की जाए। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, और हर मामले की रिपोर्ट अगले कार्य दिवस में प्रस्तुत करनी होगी।§ֆ:डीएम ने भ्रष्टाचार में संलिप्त ग्राम प्रधानों, दबंग तत्वों और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की प्रोफाइलिंग करने का निर्देश भी दिया है। शासकीय योजनाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने और संबंधित लोगों के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाने के लिए एसडीएम और बीडीओ को समन्वय से कार्रवाई करने को कहा गया है।§ֆ:जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायतों में रिक्त उचित दर दुकानों के चयन, जलभराव की समस्या, पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप रिबोर कार्य और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जून तक सभी हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने और लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।§ֆ:डीएम ने आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की गहन निगरानी करने, बार-बार आ रही समस्याओं का स्थलीय सत्यापन कर त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान या सचिव द्वारा जनहित की उपेक्षा पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।§ֆ:गर्मी और लू के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए डीएम ने आदेश दिया है कि गांवों में तालाबों और पोखरों में जलभराव सुनिश्चित किया जाए और अग्निकांड से बचाव के लिए सभी आवश्यक कार्य तीन दिन के भीतर पूरे किए जाएं।§ग्राम पंचायतों में हो रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ज़िलाधिकारी रविंद्र कुमार ने सभी उपजिलाधिकारियों (SDM), खंड विकास अधिकारियों (BDO) और पंचायत राज विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ग्राम प्रधानों के खिलाफ जांच प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाए।

