आयुष मंत्रालय ने राजधानी के Vigyan Bhawan में “दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” विषय पर राष्ट्रीय समारोह आयोजित कर विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 को भव्य रूप से मनाया। यह आयोजन होम्योपैथी के जनक Samuel Hahnemann की जयंती के अवसर पर किया गया, जिसमें देशभर से नीति निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षाविद और छात्र शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Prataprao Jadhav ने कहा कि भारत में होम्योपैथी क्षेत्र अनुसंधान, संस्थागत सहयोग और सुदृढ़ नियामक ढांचे के चलते तेजी से मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि Central Council for Research in Homeopathy (सीसीआरएच), National Commission for Homoeopathy (एनसीएच) और National Institute of Homoeopathy (एनआईएच) जैसे संस्थान शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से इस पद्धति की वैज्ञानिक विश्वसनीयता और जनविश्वास को बढ़ा रहे हैं।
श्री जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि होम्योपैथी को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, अंतर्विषयक सहयोग और सतत वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शोध, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और नीति निर्माताओं तथा चिकित्सकों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है।
इस अवसर पर आयुष मंत्रालय के सचिव Rajesh Kotecha ने बताया कि सरकार आयुष क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अनुसंधान पर लगातार निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि आयुष ग्रिड और एचएमआईएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बना रहे हैं। साथ ही, आधुनिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणालियों के माध्यम से एक कुशल और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री अलार्मेलमंगई डी. ने कहा कि होम्योपैथी आज देश की स्वास्थ्य प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने बताया that राष्ट्रीय स्तर पर होम्योपैथी चिकित्सकों का रजिस्टर और संस्थानों का विस्तार इस प्रणाली की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है। उन्होंने गुणवत्ता, पारदर्शिता और नैतिक मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
होम्योपैथी सलाहकार Preetha Kizhakkuttil ने कहा कि यह चिकित्सा पद्धति न केवल किफायती है, बल्कि दीर्घकालिक और निवारक स्वास्थ्य देखभाल में भी बेहद प्रभावी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की विभिन्न पहलों के जरिए इसकी पहुंच और एकीकरण लगातार बढ़ रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत सीसीआरएच के महानिदेशक Subhash Kaushik के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विश्व होम्योपैथी दिवस को एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि यह आयोजन शोध, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान को जनस्वास्थ्य लाभ में बदला जा सके।
वहीं, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष Tarkeshwar Jain ने कहा कि भारत में होम्योपैथी अब मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि देश में लाखों पंजीकृत चिकित्सकों और सैकड़ों शिक्षण संस्थानों का नेटवर्क इस क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है।
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों और डिजिटल पहलों का विमोचन भी किया गया। इनमें सीसीआरएच का नया लोगो, शोध पत्रिकाएं, मोनोग्राफ और चिकित्सकों के लिए मार्गदर्शिकाएं शामिल हैं। साथ ही आयुष ग्रिड पोर्टल पर प्रमाणन पाठ्यक्रम, एआई आधारित ज्ञान सामग्री और होम्योपैथी जागरूकता सप्ताह की गतिविधियों का ऑडियो-विजुअल संकलन भी प्रस्तुत किया गया।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत सरकार साक्ष्य-आधारित, किफायती और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में होम्योपैथी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसंधान, शिक्षा और डिजिटल नवाचार के माध्यम से आयुष मंत्रालय देश के हर वर्ग तक समग्र स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है।

