पंजाब में गेहूं खरीद को लेकर हालात लगातार विवादों में घिरते जा रहे हैं। किसानों द्वारा मंडियों में अव्यवस्था और खरीद प्रक्रिया की धीमी रफ्तार की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि खरीद सीजन के दौरान किसानों से समय पर गेहूं की खरीद नहीं हो रही है, जिससे किसानों और मजदूरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को प्रशासनिक विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य में खरीद व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही और खराब प्रबंधन के कारण किसान मंडियों में अपनी फसल लेकर इंतजार करने को मजबूर हैं।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए पहले ही सभी जरूरी कदम उठा लिए थे। उन्होंने बताया कि पंजाब के लिए करीब 30,973 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) मंजूर की गई थी, ताकि भुगतान और खरीद में कोई वित्तीय दिक्कत न आए। इसके अलावा बोरियों, भंडारण और अन्य व्यवस्थाओं को भी पहले से तैयार रखा गया था। इसके बावजूद अगर किसानों की फसल समय पर नहीं खरीदी जा रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और रेलवे की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि भंडारण और परिवहन के स्तर पर केंद्र की एजेंसियां सक्रिय हैं। अप्रैल महीने में 26 तारीख तक पंजाब से 275 रेल रेक्स के जरिए अनाज की ढुलाई की गई है, जिसमें गेहूं और चावल दोनों शामिल हैं। इसके बावजूद खरीद प्रक्रिया में देरी होना कई सवाल खड़े करता है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने AAP सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह किसानों की समस्याओं को हल करने के बजाय प्रचार में ज्यादा व्यस्त है। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी के बीच किसानों को मंडियों में रात गुजारनी पड़ रही है, जो प्रशासन की बड़ी विफलता को दर्शाता है। किसानों को समय पर भुगतान और फसल उठान नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।
वहीं, इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति को भी गरमा दिया है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर हमलावर है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
कुल मिलाकर, गेहूं खरीद को लेकर पंजाब में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर किसानों की आजीविका और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


