भारत के कृषि निर्यात को नई दिशा देने और “एक जिला एक उत्पाद” (ओडीओपी) योजना को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (एपीडा) की पहल पर असम के महत्वाकांक्षी जिले बाक्सा से पहली बार 20 मीट्रिक टन ओडीओपी शहद की खेप अमेरिका के लिए रवाना की गई। यह निर्यात न केवल उत्तर-पूर्व भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
यह शहद असम की एपीडा-पंजीकृत निर्यातक कंपनी Salt Range Foods Private Limited द्वारा निर्यात किया गया। इस पहल को क्षेत्रीय किसानों और उत्पादकों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादित शहद को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिला है।
असम अपनी समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक वन संपदा और पारंपरिक मधुमक्खी पालन संस्कृति के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां की कई स्वदेशी जनजातियां जैसे कार्बी, मिशिंग और बोडो समुदाय सदियों से शहद संग्रहण और उत्पादन से जुड़ी रही हैं। इन समुदायों के जीवन में शहद केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि औषधीय, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी रखता है। यही कारण है कि असम का शहद अपनी प्राकृतिक शुद्धता और विशिष्ट स्वाद के लिए खास पहचान रखता है।
राज्य के बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के बाक्सा, कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी और तामुलपुर जिले शहद उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में असम में लगभग 1,650 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ। इनमें बाक्सा जिले का शहद अपनी उच्च गुणवत्ता और लगभग जैविक विशेषताओं के कारण विशेष रूप से लोकप्रिय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाक्सा का पर्यावरण कीटनाशक मुक्त और जैव विविधता से भरपूर है, जिसके कारण यहां उत्पादित शहद में प्राकृतिक पोषक तत्वों और औषधीय गुणों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसी विशेषता को देखते हुए बाक्सा शहद को ओडीओपी योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। यह पहल स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
भारत सरकार की ओडीओपी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जिले के एक विशेष उत्पाद की पहचान कर उसे प्रोत्साहन देना है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। इस योजना के तहत उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्यवर्धन और निर्यात को बढ़ावा दिया जाता है। बाक्सा शहद का अमेरिका निर्यात इस दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।
एपीडा ने इस निर्यात को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था ने प्रसंस्करण इकाइयों में आधुनिक परीक्षण और प्रयोगशाला उपकरण उपलब्ध कराए, जिससे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। एपीडा का उद्देश्य किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़कर उन्हें बेहतर मूल्य दिलाना और कृषि निर्यात को मजबूत करना है।
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों को मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, निर्यात के माध्यम से उत्पादकों को स्थानीय बाजार मूल्य की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त होगी। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्यात पहल आकांक्षी जिलों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उत्तर-पूर्व भारत की निर्यात क्षमता को नई पहचान मिलेगी और क्षेत्र के अन्य कृषि एवं मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के द्वार खुलेंगे।
एपीडा ने किसानों के नेतृत्व वाले निर्यात को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। संस्था का कहना है कि भविष्य में भी ओडीओपी जैसी योजनाओं को सहयोग देकर भारत को उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जाएगा।

