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खरीफ 2026 के लिए खाद की जरूरत घटी, लेकिन सरकार ने बनाया रिकॉर्ड बफर स्टॉक

यूरिया की मांग 19.4 एमटी से घटाकर 19 एमटी कर दी गई है, जबकि DAP की आवश्यकता 6.6 एमटी से घटाकर 6 एमटी आंकी गई है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
June 2, 2026
in कृषि समाचार
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खरीफ 2026 के लिए खाद की जरूरत घटी, लेकिन सरकार ने बनाया रिकॉर्ड बफर स्टॉक
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भारत सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरकों की अनुमानित आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन किया है। उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि संभावित एल नीनो प्रभाव और राज्यों के साथ हुई समीक्षा बैठकों के आधार पर कृषि मंत्रालय ने खरीफ सीजन की खाद जरूरतों का दोबारा आकलन किया है। इसके बाद यूरिया और डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की कुल अनुमानित मांग को 26 मिलियन टन (एमटी) से घटाकर 25 एमटी कर दिया गया है।

संशोधित अनुमान के अनुसार, यूरिया की मांग 19.4 एमटी से घटाकर 19 एमटी कर दी गई है, जबकि DAP की आवश्यकता 6.6 एमटी से घटाकर 6 एमटी आंकी गई है। सरकार का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो खेती का रकबा और उर्वरकों की खपत भी प्रभावित हो सकती है।

कुल खाद आवश्यकता 38.39 मिलियन टन आंकी गई

सरकार ने खरीफ सीजन के लिए सभी प्रकार के उर्वरकों की कुल आवश्यकता का भी पुनर्मूल्यांकन किया है। अब कुल मांग 38.39 मिलियन टन अनुमानित की गई है।

अधिकारियों के अनुसार देश में वर्तमान समय में लगभग 19.98 मिलियन टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है, जो अनुमानित आवश्यकता का 52 प्रतिशत से अधिक है। सामान्य परिस्थितियों में यह स्तर लगभग 33 प्रतिशत के आसपास रहता है, लेकिन इस बार सरकार ने संभावित आपूर्ति जोखिमों को देखते हुए अतिरिक्त भंडारण किया है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच तैयार किया गया रणनीतिक स्टॉक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर उसके प्रभाव को देखते हुए सरकार ने बड़े पैमाने पर रणनीतिक उर्वरक भंडार तैयार किया है।

उर्वरक विभाग के मुताबिक, संकट शुरू होने के बाद से आयात और घरेलू उत्पादन के माध्यम से कुल 13.24 मिलियन टन उर्वरकों का रणनीतिक स्टॉक तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य खरीफ सीजन में किसानों को खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति भी सुरक्षित

भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाली लगभग 5 मिलियन टन उर्वरकों की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर ली है। इसमें करीब 2.5 मिलियन टन यूरिया, 1.5 मिलियन टन DAP और 1 मिलियन टन NPK उर्वरक शामिल हैं।

इन खेपों के जून और जुलाई के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे खरीफ सीजन के दौरान आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।

यूरिया आयात बढ़ाने के लिए नए टेंडर जारी

सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आयात प्रक्रिया भी तेज कर दी है। सरकारी एजेंसियों ने 1.7 मिलियन टन यूरिया आयात के लिए नया टेंडर जारी किया है।

इससे पहले अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड ने 2.5 मिलियन टन यूरिया आयात के लिए टेंडर निकाला था। इस यूरिया की आपूर्ति रूस, अल्जीरिया, नाइजीरिया और ओमान जैसे देशों से की जा रही है।

LNG आपूर्ति बाधित होने से प्रभावित हुआ था उत्पादन

पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के घरेलू यूरिया उत्पादन पर भी पड़ा था। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े जोखिम के कारण कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से एलएनजी (LNG) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी।

एलएनजी यूरिया उत्पादन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है। इसकी कमी के चलते मार्च और अप्रैल के पहले पखवाड़े में यूरिया उत्पादन में गिरावट देखी गई थी। हालांकि सरकार द्वारा स्पॉट मार्केट से LNG खरीद की अनुमति दिए जाने के बाद उत्पादन सामान्य स्तर पर लौट आया।

घरेलू उत्पादन में दर्ज हुई बढ़ोतरी

उर्वरक विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में घरेलू यूरिया उत्पादन 2.51 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.28 मिलियन टन अधिक है।

इसी प्रकार मई 2026 में DAP का उत्पादन 0.38 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो मई 2025 की तुलना में थोड़ा अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत बनी हुई है।

वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें दोगुनी

पश्चिम एशिया संकट का असर अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। फरवरी 2026 में वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत लगभग 447 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 947 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है।

यानी कुछ ही महीनों में यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि किसानों को निर्धारित दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

सब्सिडी खर्च फिलहाल नियंत्रण में

उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ते दबाव को लेकर पूछे गए सवाल पर अपर्णा शर्मा ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 1.77 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में इस आवंटन का लगभग 20 प्रतिशत ही उपयोग हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल सब्सिडी व्यय नियंत्रण में है और सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी स्थिर

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि देश में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है।

उनके अनुसार अनाज, दूध, दालें और चीनी जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। विभाग देशभर के 578 केंद्रों से 40 प्रमुख खाद्य वस्तुओं की दैनिक खुदरा और थोक कीमतों की निगरानी कर रहा है।

एल नीनो से निपटने के लिए राज्यों को निर्देश

संभावित एल नीनो प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राज्यों से बीजों का पर्याप्त भंडार रखने, फसल निगरानी बढ़ाने और आपातकालीन कृषि योजनाएं तैयार रखने को कहा गया है।

सरकार का मानना है कि समय रहते की गई तैयारियों से किसानों पर मौसम संबंधी जोखिमों का असर कम किया जा सकेगा और देश की खाद्य एवं कृषि सुरक्षा को मजबूत बनाए रखा जा सकेगा।

 

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