मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद भारत सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों को खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 70 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए दूसरा वैश्विक टेंडर जारी किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं और पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि सरकार किसानों को किसी भी प्रकार की खाद कमी से बचाने के लिए पहले से तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत फरवरी 2026 में 447 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 947 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही महीनों में यूरिया की कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
वैश्विक कीमतों में इस अभूतपूर्व उछाल के बावजूद सरकार ने आयात प्रक्रिया को जारी रखा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जा सके। अपर्णा शर्मा ने बताया कि 70 लाख टन यूरिया के लिए जारी किया गया यह दूसरा ग्लोबल टेंडर है और इसकी प्रक्रिया फिलहाल जारी है। टेंडर में प्राप्त होने वाली अंतिम कीमतों का अभी पता नहीं चला है।
उन्होंने कहा कि भारत पहले ही अपनी आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा चुका है। देश ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित स्रोतों से 25 लाख टन यूरिया और लगभग 50 लाख टन डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की व्यवस्था कर ली है। इन उर्वरकों की खेप जून और जुलाई के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे खरीफ सीजन में मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक उर्वरक व्यापार को प्रभावित किया है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और कच्चे माल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां किसी प्रकार की रुकावट आती है तो उर्वरकों और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने पहले से ही पर्याप्त रणनीतिक स्टॉक तैयार करने और वैकल्पिक स्रोतों से आयात सुनिश्चित करने की रणनीति अपनाई है।
उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान देश में घरेलू उर्वरक उत्पादन 104.81 लाख टन रहा, जबकि इसी अवधि में 27.62 लाख टन उर्वरकों का आयात किया गया। इस प्रकार कुल उपलब्धता लगभग 132.43 लाख टन रही, जो देश की मौजूदा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
इस बीच सरकार ने संभावित एल नीनो प्रभाव को ध्यान में रखते हुए खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग का भी पुनर्मूल्यांकन किया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो की स्थिति बनने पर मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, जिससे खेती का रकबा और उर्वरकों की खपत प्रभावित हो सकती है। इसी कारण कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के साथ व्यापक चर्चा के बाद खाद की मांग के अनुमान में संशोधन किया है।
नए अनुमान के अनुसार, खरीफ 2026-27 सीजन में यूरिया की मांग 194 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से 4 लाख टन कम है। इसी तरह DAP की मांग भी घटाकर 60 लाख टन कर दी गई है, जो पहले के अनुमान से 6 लाख टन कम है। सरकार का मानना है कि संशोधित मांग के अनुसार वर्तमान स्टॉक और प्रस्तावित आयात व्यवस्था किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर सरकार की सब्सिडी लागत पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल किसानों को राहत देने के लिए उर्वरकों की खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहती। इसलिए आयात लागत बढ़ने के बावजूद खाद की उपलब्धता और कीमतों को संतुलित बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि वह संभावित वैश्विक आपूर्ति संकट और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बावजूद खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। 70 लाख टन यूरिया आयात का नया टेंडर और पहले से तैयार रणनीतिक स्टॉक देश की खाद सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


