भारत में कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और लागत प्रभावी बनाने की दिशा में नैनो उर्वरकों और ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने बताया है कि नैनो-फर्टिलाइज़र के इस्तेमाल को किसानों के बीच व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि ड्रोन आधारित छिड़काव तकनीक खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव ला रही है। सरकार का मानना है कि इन तकनीकों के माध्यम से उर्वरकों की दक्षता बढ़ेगी, उत्पादन लागत घटेगी और पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक नैनो उर्वरकों की कुल बिक्री 1,593.37 लाख बोतलों (प्रत्येक 500 मिलीलीटर) तक पहुंच चुकी है। इनमें 1,219.27 लाख बोतलें नैनो यूरिया और 374.10 लाख बोतलें नैनो डीएपी की शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि किसानों के बीच इन नए उत्पादों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
सरकार के मुताबिक, नैनो उर्वरकों की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों और विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा व्यापक फील्ड ट्रायल किए गए हैं। इन परीक्षणों के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि पारंपरिक उर्वरकों के साथ पत्तियों पर स्प्रे के रूप में नैनो यूरिया के उपयोग से सामान्य यूरिया की खपत 25 से 50 प्रतिशत तक कम की जा सकती है, जबकि फसल की उपज पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। कई मामलों में तो उपज में 3 से 8 प्रतिशत तक वृद्धि भी दर्ज की गई है।
इसी प्रकार नैनो डीएपी के परीक्षणों में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शोध से संकेत मिला है कि उपयुक्त परिस्थितियों में पारंपरिक फॉस्फोरस उर्वरकों के उपयोग को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है, जबकि फसल उत्पादन लगभग समान बना रहता है। इससे किसानों की लागत घटाने और पोषक तत्वों के अधिक कुशल उपयोग की संभावना बढ़ी है।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों के दीर्घकालिक प्रभावों और विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में इनके प्रदर्शन का अध्ययन अभी जारी है। इसके लिए नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के साथ मिलकर दूसरे चरण का अध्ययन शुरू किया गया है। साथ ही ICAR के सहयोग से पांच वर्ष की अवधि वाला एक राष्ट्रीय नेटवर्क प्रोजेक्ट भी चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में पोषक तत्व उपयोग दक्षता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है।
सरकार को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर कम उपजाऊ मिट्टी वाले इलाकों में, नैनो उर्वरकों का प्रदर्शन अलग-अलग स्तर का रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार उपयोग संबंधी मानकों को अधिक स्पष्ट और वैज्ञानिक बनाने पर काम कर रही है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसान सम्मेलन, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन और अन्य प्रचार अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
नैनो उर्वरकों के प्रभावी उपयोग में ड्रोन तकनीक की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार ड्रोन आधारित स्प्रेइंग सिस्टम और बैटरी चालित आधुनिक स्प्रेयरों की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSKs) के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं और नियमित आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
ड्रोन तकनीक को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना शुरू की है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक लागू इस योजना के लिए 1,261 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे कृषि सेवाओं के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। अब तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के लाभार्थियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें से 500 ड्रोन विशेष रूप से इसी योजना के अंतर्गत दिए गए हैं।
ड्रोन प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को DGCA द्वारा अधिकृत प्रशिक्षण केंद्रों में संचालन और कृषि उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी कौशल का विकास हो रहा है और नई रोजगार संभावनाएं भी पैदा हो रही हैं।
इसके अतिरिक्त, कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत ICAR को ड्रोन उपयोग बढ़ाने के लिए 52.50 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। वर्ष 2022-23 से लेकर 15 मार्च 2026 तक कृषि संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा 297 ड्रोन खरीदे गए हैं। इस अवधि में 36,000 से अधिक प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 38,000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को कवर किया गया और हजारों किसानों को नई तकनीकों का प्रत्यक्ष लाभ मिला।
सरकार का कहना है कि नैनो उर्वरक और ड्रोन तकनीक का संयुक्त उपयोग भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री Anupriya Patel ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से साझा की।

