भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। यूरिया, डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर लेकर आ रहे चार कार्गो जहाज पिछले सप्ताह सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को पार कर भारत के विभिन्न बंदरगाहों की ओर रवाना हो गए हैं। भारत सरकार ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि इन जहाजों के आगे बढ़ने से देश में उर्वरकों की उपलब्धता और स्टॉक स्थिति को मजबूती मिली है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल, गैस और उर्वरक कच्चे माल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ऐसे में भारत के लिए उर्वरक लेकर आ रहे जहाजों का सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर लेना कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भारत सरकार ने जानकारी दी थी कि भारत की ओर आ रहे कुल 16 उर्वरक जहाज होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इन जहाजों में लगभग 7 लाख टन (700,000 टन) उर्वरक सामग्री लदी हुई थी। इससे देश में आगामी मांग को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, क्योंकि खरीफ और अन्य कृषि गतिविधियों के दौरान उर्वरकों की मांग में तेजी आती है।
अब सरकार के अनुसार, इनमें से चार जहाज सफलतापूर्वक आगे बढ़ चुके हैं और भारत के प्रमुख बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं। ये जहाज आंध्र प्रदेश के कृष्णापटनम और काकीनाडा, ओडिशा के पारादीप तथा गुजरात के मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुंचेंगे। इन बंदरगाहों से उर्वरकों का वितरण विभिन्न राज्यों में किया जाएगा, जिससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ताओं और आयातकों में शामिल है। देश में कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए यूरिया, DAP, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की भारी मात्रा में आवश्यकता होती है। हालांकि सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, फिर भी मांग और उत्पादन के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, खरीफ सीजन और अन्य फसली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत पहले ही लगभग 50 लाख टन (5 मिलियन टन) फसल पोषक तत्वों का आयात कर चुका है। इसमें यूरिया समेत कई महत्वपूर्ण उर्वरक शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाने पर जोर दिया है ताकि वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों का असर किसानों पर कम से कम पड़े।
उर्वरक क्षेत्र में भारत की एक और बड़ी चुनौती प्राकृतिक गैस की उपलब्धता है। देश यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक फीडस्टॉक के रूप में बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का आयात करता है। यदि वैश्विक स्तर पर गैस या उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर उत्पादन लागत और उपलब्धता दोनों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, वर्तमान में भारत के पास कुल 19.60 मिलियन मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह स्तर देश की मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शेष जहाज भी निर्धारित समय के अनुसार भारत पहुंच जाते हैं, तो आगामी महीनों में उर्वरक आपूर्ति को लेकर किसी बड़ी समस्या की संभावना नहीं है।
कृषि क्षेत्र के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि समय पर उर्वरक उपलब्धता सीधे फसल उत्पादन और किसानों की आय को प्रभावित करती है। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और देश में मजबूत स्टॉक स्थिति ने फिलहाल उर्वरक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है। आने वाले हफ्तों में बाकी जहाजों की आवाजाही और वैश्विक परिस्थितियों पर भी नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल भारत के लिए उर्वरक उपलब्धता के मोर्चे पर स्थिति संतोषजनक दिखाई दे रही है।

