केंद्र सरकार ने देश के श्रमिकों के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान की शुरुआत की है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने दिल्ली स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बासैदारापुर से इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत देशभर में श्रम संहिता के अंतर्गत आने वाले श्रमिकों की हर वर्ष निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जाएगी।
डॉ. मांडविया ने इस अवसर को “श्रम शक्ति” के सम्मान का दिन बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार श्रमिकों के जीवन में गरिमा, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि चार नई श्रम संहिताएं देश के श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक सुधार हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं बल्कि श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण देना भी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य जांच के माध्यम से गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान हो सकेगी, जिससे श्रमिकों को समय पर इलाज मिल पाएगा। जांच के दौरान पहचानी गई बीमारियों का उपचार और दवाएं कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की सुविधाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
डॉ. मांडविया ने देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के तेजी से विस्तार को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले जहां लगभग 30 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर लगभग 94 करोड़ तक पहुंच गई है। इस प्रकार सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने इसे श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार और कल्याणकारी योजनाओं की सफलता का प्रमाण बताया।
ईएसआईसी के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पहले इसके लाभार्थियों की संख्या करीब 7 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो चुकी है। सरकार अब छोटे प्रतिष्ठानों, खतरनाक उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों तथा असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने पर विशेष जोर दे रही है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिसने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया के कई देश अभी इस विषय पर विचार कर रहे हैं, वहीं भारत ने नई श्रम संहिताओं के माध्यम से गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को सुरक्षा देने का रास्ता तैयार कर लिया है। यह कदम डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े लाखों श्रमिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चार श्रम संहिताओं के तहत किए गए अन्य सुधारों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। साथ ही मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है। महिलाओं के लिए घर से काम करने की सुविधा को भी कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पहले श्रमिकों की समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज किया जाता था, लेकिन वर्तमान सरकार ने श्रमिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य श्रमिकों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के स्तर पर भी मजबूत बनाना है।
यह कार्यक्रम देशभर में ईएसआईसी अस्पतालों के 11 अन्य केंद्रों पर भी एक साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के मंत्री Kapil Mishra, ईएसआईसी के महानिदेशक Ashok Kumar Singh, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश के करोड़ों श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी।

