सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कृषि शिक्षा, शोध और Biotechnology के क्षेत्र में शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से 14 दिवसीय Faculty Development Training Programme का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एग्रीकल्चर बार टेक्नोलॉजी, उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, लखनऊ तथा Department of Biotechnology (DBT), नई दिल्ली के तत्वावधान में कॉलेज ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में आयोजित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कॉलेज ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के कॉन्फ्रेंस हॉल में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक Biotechnology, Molecular Biotechnology, Microbial Biotechnology तथा Bioinformatics जैसे उभरते क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकों और शोध पद्धतियों से परिचित कराना है।
नई शिक्षा नीति और विकसित भारत 2047 के अनुरूप हो कृषि शिक्षा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि शिक्षा और शोध को New Education Policy (NEP) तथा Viksit Bharat 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में कृषि क्षेत्र केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें Biotechnology, Molecular Biology, Microbial Technology और Bioinformatics जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
कुलपति ने कहा कि कृषि की नई चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए modern scientific research, innovation और technology-based education को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि Biotechnology कृषि के विकास, बेहतर उत्पादन, रोग एवं कीट प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद और sustainable agriculture के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के Faculty Development Programme शिक्षकों के Career Advancement के साथ-साथ उनके academic और research skills को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षक नई तकनीकों और शोध पद्धतियों को समझकर उन्हें अपने teaching तथा research programmes में प्रभावी रूप से शामिल कर सकेंगे।
शिक्षकों और शोधार्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण का लाभ
कुलपति ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन New Education Policy 2020 तथा विश्वविद्यालय की आधुनिक शिक्षा और शोध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागी यहां प्राप्त ज्ञान और तकनीकी अनुभव का उपयोग अपने-अपने शिक्षण एवं शोध कार्यों में करेंगे।
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और research ecosystem को मजबूत करने के लिए ऐसे Capacity Building Programmes का आयोजन निरंतर किया जाना चाहिए। इससे न केवल शिक्षकों की professional competency बढ़ेगी, बल्कि शोधार्थियों को भी नई वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में सीखने का अवसर मिलेगा।
शोध की गुणवत्ता में होगा सुधार
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वी.पी. सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों और शोधकर्ताओं को research की नई दिशा प्रदान करते हैं। आधुनिक तकनीकों के बारे में नियमित प्रशिक्षण मिलने से शोध कार्यों की quality और relevance में सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि और Biotechnology के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वे नई research technologies और scientific developments से लगातार अपडेट रहें। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Biotechnology के नए क्षेत्रों पर होगा फोकस
14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में Biotechnology से जुड़े विभिन्न आधुनिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनमें Molecular Biotechnology, Microbial Biotechnology, Bioinformatics सहित कृषि से संबंधित आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकें शामिल हैं।
इन क्षेत्रों का उपयोग कृषि में बेहतर crop varieties विकसित करने, plant health management, microbial resources के उपयोग, genetic analysis और agricultural research को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को theoretical knowledge के साथ-साथ research-oriented learning का अवसर भी मिलेगा।
30 प्रतिभागी ले रहे हैं हिस्सा
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि इस 14 दिवसीय Faculty Development Training Programme में कुल 30 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक Biotechnology और उससे जुड़ी research methodologies की जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने teaching और research activities में इनका बेहतर उपयोग कर सकें।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. आर.एस. सेंगर, अधिष्ठाता, बायोटेक्नोलॉजी द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. रेखा दीक्षित ने प्रस्तुत किया।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की रही उपस्थिति
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें निदेशक शोध डॉ. कमल खिलाड़ी, निदेशक प्रसार डॉ. सत्येंद्र खारी, अधिष्ठाता कृषि डॉ. रामजी सिंह, अधिष्ठाता हॉर्टिकल्चर डॉ. बिजेंद्र सिंह तथा अधिष्ठाता टेक्नोलॉजी डॉ. जयवीर सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षक शामिल रहे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में महेश कुमार भारती, डॉ. नीलेश कपूर, डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, दामिनी, डॉ. प्रवीण तथा डॉ. हिमांशु की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के सफल आयोजन में इनका विशेष योगदान रहा।
कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित यह 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि शिक्षा और शोध को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। Biotechnology, Molecular Biotechnology और Bioinformatics जैसे क्षेत्रों में शिक्षकों की क्षमता विकसित होने से आने वाले समय में कृषि शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि क्षेत्र में climate change, crop diseases, productivity, soil health और sustainable farming जैसी चुनौतियों का समाधान खोजने में advanced biotechnology research की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर Faculty Development और Capacity Building Programmes का आयोजन कृषि शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकता है।
14 दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक scientific approaches, research techniques और emerging technologies की जानकारी मिलेगी, जिससे वे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बदलती कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर शिक्षा एवं शोध मार्गदर्शन प्रदान कर सकेंगे।

