ग्रामीण भारत की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में स्थापित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन समिति (BRLPS-जीविका) के संयुक्त तत्वावधान में गया स्थित बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (BIPARD) में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में ‘6 करोड़ लखपति दीदी’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक रणनीति, रोडमैप और वित्त वर्ष 2026-27 का वार्षिक कार्ययोजना (Annual Action Plan) तैयार की गई।
यह कार्यशाला “Making of 6 Crore Lakhpati Didis: Farm, Non-Farm Livelihoods and MIS Strategy & Roadmap” विषय पर आयोजित की गई, जिसमें देशभर के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLMs), नीति निर्माताओं, विकास साझेदारों, तकनीकी विशेषज्ञों और आजीविका क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दो दिनों तक चली गहन चर्चाओं में कृषि आधारित आजीविका, गैर-कृषि उद्यम, डिजिटल प्रबंधन प्रणाली (MIS), बाजार संपर्क, महिला उद्यमिता और सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर विस्तृत मंथन हुआ।
3 करोड़ से 6 करोड़ लखपति दीदी तक का सफर
कार्यशाला को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि देश ने 3 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs), सामुदायिक संस्थाओं और राज्यों के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य 6 करोड़ लखपति दीदी तैयार करना है। इसके लिए पहले चरण के अनुभव, नवाचार, तकनीकी सुधार और सफल मॉडल नई रणनीति की मजबूत नींव बनेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवर्तन की इस यात्रा में तकनीक, बाजार आधारित उद्यम, वित्तीय समावेशन, विभिन्न योजनाओं का अभिसरण (Convergence) और नवाचार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अपने संबोधन का समापन उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध पंक्ति “हम कौन थे, क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी” से करते हुए सभी राज्यों को इस राष्ट्रीय लक्ष्य को समय पर पूरा करने का आह्वान किया।
महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण का राष्ट्रीय अभियान
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में ग्रामीण विकास मंत्रालय की निदेशक (ग्रामीण आजीविका) राजेश्वरी एस.एम. ने कहा कि ‘लखपति दीदी’ केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का राष्ट्रीय अभियान है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंचाना है, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने कहा कि यह मिशन महिलाओं को केवल रोजगार नहीं देता, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने, नेतृत्व विकसित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करता है।
ज्ञान साझा करने और नवाचार पर जोर
BRLPS-जीविका की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनन्या सिंह ने कार्यशाला में सभी राज्यों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों के सफल आजीविका मॉडल एक-दूसरे के लिए सीखने का अवसर हैं। उन्होंने राज्यों के बीच ज्ञान साझा करने, नवाचारों को अपनाने और सफल प्रयोगों का विस्तार करने पर विशेष बल दिया।
वहीं बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि अभिसरण (Convergence), नवाचार और बाजार आधारित आजीविका मॉडल ही 6 करोड़ लखपति दीदी के लक्ष्य को प्राप्त करने की मजबूत आधारशिला बनेंगे।
कृषि और गैर-कृषि आजीविका पर हुआ मंथन
कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को तीन तकनीकी समूहों में विभाजित किया गया, जिनमें कृषि आधारित आजीविका (Farm Livelihoods), गैर-कृषि आजीविका (Non-Farm Livelihoods) और मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (MIS) पर विस्तृत चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, डेयरी, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग, मूल्य श्रृंखला (Value Chain), डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा प्रबंधन जैसे विषयों पर अपने सुझाव दिए। विभिन्न राज्यों द्वारा संचालित सफल मॉडल भी प्रस्तुत किए गए, जिनसे अन्य राज्यों को सीखने का अवसर मिला।
डिजिटल तकनीक बनेगी मिशन की ताकत
कार्यशाला के दूसरे दिन MIS रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। ग्रामीण विकास मंत्रालय के उप निदेशक रमन वाधवा तथा राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई (NMMU) की टीम ने कृषि और गैर-कृषि आजीविका के लिए रणनीतिक ढांचा प्रस्तुत किया।
इसके बाद शांतनु बोही और NMMU टीम ने बताया कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा आधारित निर्णय, रियल टाइम मॉनिटरिंग और राज्यों के बीच डेटा एकीकरण इस मिशन की सफलता के प्रमुख आधार होंगे।
विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और महिलाओं की आय में वास्तविक वृद्धि का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
बाजार से जुड़ेंगी ग्रामीण महिलाएं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने कहा कि DAY-NRLM के माध्यम से देशभर में महिलाओं की आय बढ़ाने और सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
उन्होंने बताया कि मिशन का अगला चरण उद्यमों में विविधता, मूल्य संवर्धन (Value Addition), डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग, बाजार से सीधा जुड़ाव, जलवायु अनुकूल आजीविका और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण पर केंद्रित होगा।
उन्होंने राज्यों से डेटा आधारित योजना बनाने, डिजिटल प्रणालियों का प्रभावी उपयोग करने तथा सामुदायिक संस्थाओं को और मजबूत करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने लखपति दीदी के क्षमता निर्माण के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई।
6 करोड़ लखपति दीदी के लिए तैयार हुआ रोडमैप
कार्यशाला के दूसरे दिन सभी तकनीकी समूहों द्वारा दिए गए सुझावों को एकीकृत कर 2026-27 की रणनीति, रोडमैप और वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।
इस दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से आगामी वर्षों की प्राथमिकताओं, कार्यान्वयन रणनीति और समय-सीमा पर सहमति बनाई। स्वाति शर्मा ने राज्यों से लखपति दीदी डैशबोर्ड का नियमित उपयोग करने तथा आवश्यकता पड़ने पर डिजिटल एप्लिकेशन के लिए पुनः प्रशिक्षण (Refresher Training) आयोजित करने की भी बात कही।
पुस्तक का विमोचन और एमओयू पर हस्ताक्षर
कार्यशाला के दौरान “Fostering Pathways for Rural Transformation” पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। इसके अलावा बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन समिति (BRLPS-जीविका) और अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ArSRLM) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच संस्थागत सहयोग, ज्ञान साझा करना, सफल मॉडलों का आदान-प्रदान और आजीविका कार्यक्रमों को और मजबूत बनाना है।
ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की दिशा में मजबूत पहल
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि ग्रामीण महिलाओं को केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रामीण उद्योग, डिजिटल सेवाओं, लघु उद्यमों और बाजार आधारित व्यवसायों से जोड़कर स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों द्वारा तैयार की गई इस नई रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में लाखों ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
महिलाओं की समृद्धि से मजबूत होगा ग्रामीण भारत
दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला केवल अनुभव साझा करने का मंच नहीं रही, बल्कि यह नीति निर्माण, नवाचार, अंतर-राज्यीय सहयोग और भविष्य की रणनीति तय करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी साबित हुई। कार्यशाला के अंत में सभी राज्यों ने 6 करोड़ लखपति दीदी के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक, बाजार, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और सामुदायिक संस्थाओं को समान रूप से मजबूत किया जाए, तो यह मिशन न केवल करोड़ों महिलाओं की आय बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण भारत की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

