भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड (AgIn) ने नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित “ICAR Technology Portfolio for Corporate Social Responsibility (CSR) Conclave 2026” के माध्यम से भारतीय कृषि को नई दिशा देने की पहल की। इस राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का उद्देश्य कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों और किसानों के बीच मजबूत सेतु तैयार करना था, ताकि वैज्ञानिक नवाचारों का लाभ देश के अंतिम किसान तक पहुंच सके।
इस अवसर पर देश की प्रमुख कॉर्पोरेट कंपनियों, उद्योग संगठनों, वित्तीय संस्थानों, परोपकारी संस्थाओं, स्टार्टअप्स, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और विकास संगठनों ने भाग लिया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि वैज्ञानिक अनुसंधान और कॉर्पोरेट निवेश एक साथ आगे बढ़ें, तो भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सकता है।
कृषि विकास में CSR की बढ़ती भूमिका
कॉन्क्लेव में आईसीएआर ने अपनी CSR-Ready Technology Portfolio प्रस्तुत की, जिसमें ऐसी तकनीकों और शोध परियोजनाओं को शामिल किया गया है जिन्हें कॉर्पोरेट कंपनियां अपने CSR कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तक पहुंचा सकती हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है।
कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई कि आज देश की बड़ी कंपनियां कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए पहले की तुलना में अधिक रुचि दिखा रही हैं। यही कारण है कि इस वर्ष के कॉन्क्लेव में 75 से अधिक उद्योगों के लगभग 150 प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आईसीएआर के साथ साझेदारी में गहरी रुचि दिखाई।
इसके अतिरिक्त 570 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया, जबकि यूट्यूब लाइव प्रसारण को 1,600 से अधिक लोगों ने देखा। इससे कार्यक्रम की पहुंच देशभर के कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों तक व्यापक स्तर पर हुई।
पांच प्रमुख विषयों पर रहा विशेष फोकस
इस वर्ष आयोजित कॉन्क्लेव में कृषि के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पांच महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष चर्चा की गई।
1. जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि
विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए ऐसी तकनीकों पर जोर दिया जो सूखा, बाढ़, तापमान वृद्धि और अनियमित वर्षा जैसी चुनौतियों का सामना करने में किसानों की मदद कर सकें। जलवायु अनुकूल खेती को भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया गया।
2. प्राकृतिक समाधानों से मृदा स्वास्थ्य सुधार
कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए प्राकृतिक एवं जैविक उपायों, फसल विविधीकरण, जैव उर्वरकों और टिकाऊ खेती की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ कृषि और बेहतर उत्पादन की आधारशिला है।
3. स्वास्थ्य के लिए कृषि
कॉन्क्लेव में पोषणयुक्त (Biofortified) फसलों, सुरक्षित खाद्य उत्पादन, जैविक खेती और पौष्टिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि केवल भोजन उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों के स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ी हुई है।
4. कृषि कौशल विकास
ग्रामीण युवाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, डिजिटल उपकरणों, ड्रोन, कृषि मशीनरी तथा उद्यमिता से जोड़ने के लिए स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
5. कृषि में महिलाओं की भागीदारी
कार्यक्रम में महिला किसानों और कृषि विस्तार सेवाओं में उनकी भूमिका को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि महिलाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिले तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास दोनों को नई गति मिलेगी।
देशभर में आयोजित किए गए रोड शो
मुख्य कॉन्क्लेव से पहले आईसीएआर और एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड ने देश के विभिन्न हिस्सों में चार क्षेत्रीय CSR एवं टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो रोड शो आयोजित किए। इनका उद्देश्य विभिन्न राज्यों की कंपनियों और उद्योगों को आईसीएआर की तकनीकों से जोड़ना तथा कृषि विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना था।
इन रोड शो का आयोजन 20 जून को हैदराबाद, 23 जून को बेंगलुरु, 1 जुलाई को मुंबई और 7 जुलाई को कोलकाता में किया गया। इन कार्यक्रमों में आईसीएआर संस्थानों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों और मीडिया के प्रतिनिधियों सहित 500 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया।
इन बैठकों के दौरान कई कंपनियों ने कृषि तकनीकों के व्यवसायीकरण, किसानों के प्रशिक्षण, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और आधुनिक कृषि समाधान अपनाने के लिए आईसीएआर के साथ मिलकर कार्य करने में रुचि दिखाई।
प्रमुख कंपनियों ने किया सहयोग का ऐलान
कॉन्क्लेव के समापन पर देश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थानों ने आईसीएआर तथा एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड के साथ CSR और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं के माध्यम से साझेदारी करने की घोषणा की।
इनमें एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AICL), SBI Foundation, UCO Bank, ICICI Foundation, Biovet Pvt. Ltd., Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry (FICCI), INFAH, Venkateshwara Hatcheries Pvt. Ltd., Pidilite Industries Ltd. और Yes Bank प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इन संस्थानों ने किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों को पहुंचाने, अनुसंधान आधारित परियोजनाओं को समर्थन देने, कृषि नवाचारों का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।
किसानों तक तेजी से पहुंचेगी नई तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें तभी सफल मानी जाएंगी जब उनका लाभ किसानों तक समय पर पहुंचे। कॉर्पोरेट क्षेत्र के सहयोग से आईसीएआर द्वारा विकसित उन्नत बीज, जलवायु अनुकूल तकनीकें, कृषि मशीनरी, प्राकृतिक खेती के मॉडल, डिजिटल कृषि समाधान और कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार कहीं अधिक तेजी से किया जा सकेगा।
CSR निवेश के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन परियोजनाएं, डिजिटल सलाह, कृषि उद्यमिता और बाजार से जुड़ने के बेहतर अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे कृषि क्षेत्र में नवाचारों को अपनाने की गति बढ़ेगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
विज्ञान, उद्योग और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी
आईसीएआर ने इस कॉन्क्लेव के माध्यम से स्पष्ट किया कि भारतीय कृषि का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि वैज्ञानिक संस्थानों, निजी उद्योगों, वित्तीय संगठनों, स्टार्टअप्स और सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव होगा।
कॉन्क्लेव ने यह साबित किया कि यदि CSR संसाधनों का रणनीतिक उपयोग कृषि अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण और ग्रामीण विकास में किया जाए, तो भारतीय कृषि अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बन सकती है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी यह साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026 भारतीय कृषि अनुसंधान और कॉर्पोरेट जगत के बीच सहयोग का एक नया अध्याय साबित होगा। विज्ञान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के इस संगम से न केवल कृषि तकनीकों का तेजी से विस्तार होगा, बल्कि देश के करोड़ों किसानों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

