सरकारी संस्था कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने मार्केटिंग सीजन 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कपास खरीद में बढ़ोतरी दर्ज की है। इस सीजन में अब तक CCI ने करीब 104.01 लाख गांठों की खरीद की है, जो पिछले साल की 100.16 लाख गांठों की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत ज्यादा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस साल किसानों से MSP पर कपास खरीद का दायरा बढ़ा है और कई राज्यों में खरीद तेज रही है।
CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने ‘बिजनेसलाइन’ से बातचीत में बताया कि इस सीजन में कपास खरीद अब अपने अंतिम चरण में है। MSP पर कपास खरीद की आखिरी तारीख 13 मार्च तय की गई है, जिसके बाद मौजूदा सीजन की खरीद प्रक्रिया लगभग पूरी हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि खरीद के साथ-साथ बाजार में बिक्री भी शुरू हो चुकी है। CCI ने अब तक करीब 17.50 लाख गांठें कपास की बिक्री कर दी है। इससे बाजार में कपास की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को संतुलित रखने में मदद मिल रही है।
अगर राज्यवार खरीद की बात करें तो तेलंगाना इस सीजन में सबसे आगे रहा है। यहां CCI ने 31.70 लाख गांठें कपास की खरीद की है। इसके बाद महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है, जहां से 27.23 लाख गांठें खरीदी गई हैं। वहीं गुजरात तीसरे नंबर पर रहा है, जहां से 19.96 लाख गांठों की खरीद हुई है।
दक्षिण और पश्चिम भारत के अलावा अन्य राज्यों में भी खरीद जारी रही। कर्नाटक चौथे स्थान पर है, जहां CCI ने 7.01 लाख गांठें खरीदी हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 5.55 लाख गांठों से ज्यादा कपास की खरीद हुई है। आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 3.90 लाख गांठों का रहा, जबकि राजस्थान से 3.46 लाख गांठों की खरीद दर्ज की गई है।
उत्तर और पूर्व भारत के राज्यों में भी CCI ने MSP पर खरीद की है। ओडिशा में 2.70 लाख गांठें, हरियाणा में 2.04 लाख गांठें और पंजाब में करीब 0.47 लाख गांठें कपास खरीदी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में MSP पर कपास खरीद में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। जब भी बाजार में कीमतें MSP से नीचे जाती हैं, तब CCI किसानों से सीधे खरीद करके उन्हें समर्थन देती है। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल पाता है और बाजार में कीमतों का संतुलन भी बना रहता है।
पिछले पांच वर्षों में CCI द्वारा कपास खरीद का दायरा लगातार बढ़ा है। कई राज्यों में खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है और डिजिटल सिस्टम के जरिए भुगतान को भी तेज किया गया है। इसका फायदा खासतौर पर छोटे और मध्यम किसानों को मिल रहा है।
कुल मिलाकर, 2025-26 के इस मार्केटिंग सीजन में CCI की बढ़ी हुई खरीद से यह संकेत मिलता है कि सरकार किसानों को MSP का लाभ दिलाने के लिए सक्रिय रूप से बाजार में हस्तक्षेप कर रही है। वहीं, आने वाले महीनों में कपास की बिक्री और निर्यात की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करेगी।

