भारत में आने वाले समय में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करना महंगा हो सकता है। सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में दूरसंचार विभाग यानी Department of Telecommunications (DoT) से स्टडी करने को कहा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि डेटा यूज़ पर टैक्स लगाना व्यावहारिक है या नहीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी एक रिव्यू मीटिंग में यह मुद्दा सामने आया। इसके बाद DoT को निर्देश दिया गया कि वह इस बात का आकलन करे कि मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर अलग से टैक्स लगाया जा सकता है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि अगर ऐसा टैक्स लागू किया जाए तो उसका मॉडल क्या होगा और उसे लागू करने का तरीका कैसा होगा।
सूत्रों के मुताबिक सरकार जिस विकल्प पर विचार कर रही है, उसमें मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर ₹1 प्रति GB का टैक्स लगाया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो हर बार जब कोई यूजर मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करेगा, उस पर यह अतिरिक्त चार्ज जुड़ सकता है। यानी जितना ज्यादा डेटा इस्तेमाल होगा, उतना ही ज्यादा टैक्स भी देना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अगर ₹1 प्रति GB का टैक्स लागू किया जाता है तो इससे सरकार को हर साल करीब ₹22,900 करोड़ तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। भारत में मोबाइल डेटा की खपत दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली खपतों में से एक मानी जाती है, इसलिए सरकार इसे संभावित राजस्व स्रोत के तौर पर देख रही है।
हालांकि अभी यह सिर्फ शुरुआती स्तर का प्रस्ताव बताया जा रहा है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। DoT की स्टडी और सिफारिशों के बाद ही सरकार इस पर आगे कदम उठाएगी। अगर विभाग को यह मॉडल व्यवहारिक और लागू करने योग्य लगता है, तभी इस पर औपचारिक निर्णय लिया जा सकता है।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां मोबाइल डेटा बेहद सस्ता माना जाता है। सस्ते इंटरनेट की वजह से देश में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया ऐप्स, ऑनलाइन गेमिंग और शॉर्ट वीडियो या रील्स देखने की वजह से मोबाइल डेटा की खपत लगातार बढ़ती जा रही है।
इसके अलावा यह भी ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा समय में मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर पहले से ही 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। यानी उपभोक्ता टेलीकॉम सेवाओं पर टैक्स पहले से दे रहे हैं। ऐसे में अगर भविष्य में मोबाइल डेटा पर अलग से टैक्स लगाया जाता है तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा एक नया अतिरिक्त चार्ज होगा।
टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा टैक्स लागू होता है तो इसका असर आम मोबाइल यूजर्स पर पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो रोजमर्रा के काम, पढ़ाई या मनोरंजन के लिए बड़े पैमाने पर मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल सबकी नजर DoT की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके आधार पर सरकार आगे का फैसला ले सकती है।

