महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में अंतर्देशीय मत्स्य पालन को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। केंद्रीय बजट 2026-27 में देशभर में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की घोषणा की गई है, जिसमें महाराष्ट्र का कोंकण क्षेत्र भी शामिल है। इस कदम का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जलीय कृषि को प्रोत्साहन देना और मछुआरों की आय में वृद्धि करना है।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में 34 जलाशयों का चयन एकीकृत विकास के लिए किया गया है। इन जलाशयों में कोंकण क्षेत्र भी शामिल है। सरकार का मानना है कि जलाशयों और अमृत सरोवरों का सुनियोजित उपयोग कर अंतर्देशीय मत्स्य पालन को नई दिशा दी जा सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत कोंकण के प्रमुख जिलों रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में मछली मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कोल्ड चेन इकाइयों को स्वीकृति दी गई है। रायगढ़ जिले में 40, रत्नागिरी में 62 और सिंधुदुर्ग में 96 कोल्ड चेन इकाइयों को मंजूरी मिली है। इस प्रकार इन तीनों जिलों में कुल 198 कोल्ड चेन इकाइयों के विकास को स्वीकृति दी गई है। यह व्यवस्था मछली के संरक्षण, भंडारण और विपणन को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
मत्स्य क्षेत्र में कोल्ड चेन की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि इससे मछली को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है। कोंकण क्षेत्र में इन इकाइयों की स्थापना से मछुआरों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना है। साथ ही, मछली को दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाने में भी आसानी होगी, जिससे पूरे मूल्य तंत्र को लाभ मिलेगा।
मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार सहकारी समितियों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन यानी एफएफपीओ को भी बढ़ावा दे रही है। कोंकण क्षेत्र में इस समय 12 एफएफपीओ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। ये संगठन मछुआरों को सामूहिक रूप से जोड़ने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और उत्पादन से लेकर बिक्री तक बेहतर प्रबंधन में मदद करते हैं। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मछली उत्पादकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग स्टार्टअप और महिला नेतृत्व वाले समूहों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। कोंकण क्षेत्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मत्स्य और उससे जुड़ी गतिविधियों के विकास के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी भी की जा रही है, ताकि योजनाओं का लाभ समय पर लाभार्थियों तक पहुंच सके।
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से बजट घोषणा को तय समय सीमा में लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसमें स्पष्ट लक्ष्य और चरणबद्ध कार्यान्वयन का प्रावधान किया गया है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि कोंकण क्षेत्र में जलाशयों और अमृत सरोवरों का उपयोग केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें मत्स्य विकास और ग्रामीण आजीविका के मजबूत माध्यम के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने यह जानकारी दी। सरकार की इस पहल को कोंकण क्षेत्र में मत्स्य क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।

