Punjab Agricultural University द्वारा क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बठिंडा में आयोजित खरीफ सीजन के किसान मेले में मंगलवार को किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। बठिंडा और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने मेले में सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस वर्ष मेले का मुख्य विषय “कृषि विविधीकरण को अपनाना और पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण” रहा। इस दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत बीजों के उपयोग, सहायक कृषि गतिविधियों को अपनाने, बेहतर मार्केटिंग सिस्टम विकसित करने और कृषि रिकॉर्ड बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक किया। किसानों ने विभिन्न स्टॉलों पर जाकर वैज्ञानिकों से संवाद किया, लाइव डेमो देखे और गुणवत्तापूर्ण बीज व कृषि सामग्री भी खरीदी।
इस अवसर पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री Gurmeet Singh Khuddian मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने घटती मिट्टी और पानी की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी, ताकि पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण किया जा सके।
मेले में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए, जहां वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों और नई विकसित फसलों की किस्मों के बारे में जानकारी दी। इनमें धान की PR 133, कपास की PBD 88, मूंग की TMB 37, बासमती की CSR 30, पंजाब बासमती 4 और 5, गन्ने की 94, सोयाबीन की SL 955 और अरहर की AL 1992 प्रमुख रहीं।
Dr Satbir Singh Gosal, वाइस-चांसलर, PAU ने मेले का उद्घाटन किया और किसानों से अपील की कि वे खेती को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाएं। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से खेती करने, हाइब्रिड बीज उत्पादन, मिट्टी परीक्षण और मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन व फूड प्रोसेसिंग जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने सहकारी मार्केटिंग, मशीनीकरण, बायो फर्टिलाइजर के उपयोग और फलों की मक्खी नियंत्रण के लिए ट्रैप जैसी तकनीकों को अपनाने की भी सलाह दी।
Dr Makhan Singh Bhullar ने कार्यक्रम में आए किसानों का स्वागत किया और महिलाओं की भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने किसानों को पानी, खाद और कीटनाशकों का संतुलित उपयोग करने तथा लागत कम करने के उपाय अपनाने की सलाह दी।
Dr Ajmer Singh Dhatt ने किसान मेले को विज्ञान और व्यवहारिक खेती का संगम बताते हुए कहा कि PAU द्वारा अब तक 991 से अधिक फसल किस्में विकसित की जा चुकी हैं, जिनमें से लगभग 250 राष्ट्रीय स्तर पर अनुशंसित हैं। उन्होंने PR 133 धान, PBD 88 कपास और NK 7328 मक्का जैसी उच्च उत्पादन वाली किस्मों की जानकारी भी साझा की।
उन्होंने बागवानी फसलों में खरबूजा (MH 56), बैंगन (बंगन-7), मटर (अगेता-8), आड़ू (Punjab Peach-1, 2) और नेक्टरिन जैसी उन्नत किस्मों का भी उल्लेख किया और क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने की सिफारिश की। साथ ही उन्होंने किसानों को 25 जून से पहले धान की रोपाई न करने और पराली जलाने के बजाय उसे खेत में मिलाने की सलाह दी।
बठिंडा के विधायक Jagroop Singh Gill ने किसानों की मार्केटिंग समस्याओं को उठाते हुए कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने किसानों को पशुपालन अपनाने की भी सलाह दी, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
कार्यक्रम के अंत में Dr Karamjit Singh Sekhon ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
किसान मेले ने एक बार फिर यह साबित किया कि सही जानकारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार के जरिए खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। यह आयोजन किसानों के लिए सीखने, जुड़ने और आगे बढ़ने का एक सशक्त मंच बना।

