केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण भारत में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-ग्रामस्वराज पहल अब पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। पंचायती राज मंत्रालय के तहत संचालित ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना (MMP) के जरिए ग्राम स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है।
इस पहल की शुरुआत 24 अप्रैल 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के शुभारंभ के साथ हुई थी। इसके बाद विकसित मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पंचायतों को अपनी वार्षिक ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करने, लेखांकन करने, कार्यों की निगरानी करने और भुगतान प्रक्रिया को ऑनलाइन संचालित करने की सुविधा प्रदान की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की कुल 2.58 लाख ग्राम पंचायतों में से लगभग 2.44 लाख पंचायतों (94.37%) ने ई-ग्रामस्वराज–पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से 39,440 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया है। इससे न केवल फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भुगतान में देरी भी काफी हद तक कम हुई है।
ई-ग्रामस्वराज के साथ-साथ कई अन्य डिजिटल ऐप भी पंचायतों के लिए विकसित किए गए हैं। ‘मेरी पंचायत’ ऐप के जरिए आम नागरिक पंचायत की योजनाओं और कार्यों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, ‘पंचायत निर्णय’ ऐप ग्राम सभा बैठकों के संचालन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाता है। इसके अतिरिक्त, ‘ऑडिटऑनलाइन’ ऐप पंचायतों के वित्तीय लेन-देन का ऑनलाइन ऑडिट सुनिश्चित करता है।
डिजिटल नवाचार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम ‘सभासार’ प्लेटफॉर्म है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक का उपयोग कर ग्राम सभा बैठकों की कार्यवाही को स्वतः रिकॉर्ड और संक्षेपित करता है। 18 मार्च 2026 तक 1.17 लाख से अधिक पंचायतों ने इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए 2.39 लाख से ज्यादा बैठक कार्यवृत्त अपलोड किए हैं।
हालांकि, संविधान के अनुसार पंचायतों का प्रशासन और बुनियादी ढांचा विकास राज्यों का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना के अंतर्गत पंचायत भवनों का निर्माण, कंप्यूटर खरीद और सामान्य सेवा केंद्र (CSC) की स्थापना जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए केंद्र सरकार पंचायतों में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसके अलावा, राज्यों को 15वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग और अन्य संसाधनों के माध्यम से भी पंचायतों के विकास के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ई-ग्रामस्वराज पहल ने ग्रामीण भारत में शासन के तरीके को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से न केवल पंचायतों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनी है, बल्कि इससे ग्रामीण नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ी है। आने वाले समय में यह पहल ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण का आधार स्तंभ साबित हो सकती है।

