केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए पंद्रहवां वित्त आयोग (XV Finance Commission) के तहत मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब और मिजोरम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को ₹1,142 करोड़ से अधिक की राशि जारी की है। इस पहल का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना और जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा देना है।
जारी अनुदान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए है और इसे बिना शर्त (Untied Grants) के रूप में प्रदान किया गया है, जिससे स्थानीय निकाय अपनी जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों पर खर्च कर सकें।
मध्य प्रदेश को सबसे अधिक राशि
मध्य प्रदेश को इस मद में सबसे अधिक ₹631.91 करोड़ की राशि दूसरी किस्त के रूप में जारी की गई है। यह धनराशि राज्य की 51 जिला पंचायतों, 300 ब्लॉक पंचायतों और 22,933 ग्राम पंचायतों को लाभान्वित करेगी। इसके अतिरिक्त, पूर्व में रोकी गई राशि में से भी ₹1.26 करोड़ अतिरिक्त पात्र पंचायतों को जारी किए गए हैं।
झारखंड को ₹269 करोड़ से अधिक
झारखंड को ₹269.03 करोड़ की पहली किस्त जारी की गई है, जिससे राज्य की 23 जिला पंचायतों, 264 ब्लॉक पंचायतों और 4,344 ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा। साथ ही, पिछले वित्त वर्ष की रोकी गई राशि में से ₹3.65 करोड़ भी अतिरिक्त रूप से जारी किए गए हैं।
पंजाब और मिजोरम को भी मिला अनुदान
पंजाब को दूसरी किस्त के रूप में ₹222 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो 13,262 ग्राम पंचायतों, 150 ब्लॉक पंचायतों और 22 जिला पंचायतों के लिए हैं। वहीं, मिजोरम को ₹14.80 करोड़ जारी किए गए हैं, जिससे राज्य की 816 ग्राम परिषदों को लाभ मिलेगा।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार खर्च की छूट
इन बिना शर्त अनुदानों का उपयोग पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कर सकती हैं। यह राशि संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों के अंतर्गत विकास कार्यों—जैसे ग्रामीण बुनियादी ढांचा, सामुदायिक सुविधाएं और अन्य जनहित कार्यों—पर खर्च की जा सकेगी।
स्वच्छता और जल प्रबंधन पर भी जोर
इसके अलावा, बंधित अनुदानों का उपयोग स्वच्छता बनाए रखने, खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति को सुदृढ़ करने, अपशिष्ट प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए किया जाएगा।
केंद्र सरकार यह अनुदान पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर जारी करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा वितरित किया जाता है।
ग्रामीण विकास को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास तेज होगा, स्थानीय प्रशासन की क्षमता मजबूत होगी और लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार आएगा।
कुल मिलाकर, यह कदम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

