RiceResearch: तेजी से बदलते मौसम, बढ़ती आबादी और खेती में नई चुनौतियों के बीच कृषि वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो कम समय में बेहतर फसल किस्में विकसित कर सकें. इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हैदराबाद के राजेंद्रनगर स्थित ICAR-Indian Institute of Rice Research ने अत्याधुनिक ‘स्पीड ब्रीडिंग’ सुविधा पर काम शुरू कर दिया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत संचालित यह संस्थान धान अनुसंधान के क्षेत्र में देश का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
इस नई तकनीक के जरिए अब धान समेत कई फसलों की नई और उन्नत किस्में पहले की तुलना में बेहद कम समय में तैयार की जा सकेंगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां पारंपरिक ब्रीडिंग प्रक्रिया में किसी नई किस्म को विकसित और स्थिर करने में करीब 4 से 5 साल लग जाते थे, वहीं स्पीड ब्रीडिंग तकनीक की मदद से यही काम लगभग 2 साल में पूरा किया जा सकेगा.
नियंत्रित वातावरण में होगी तेज रिसर्च
स्पीड ब्रीडिंग तकनीक पूरी तरह नियंत्रित वातावरण पर आधारित होती है. इसमें पौधों के विकास के लिए जरूरी कारकों जैसे तापमान, रोशनी की तीव्रता, प्रकाश अवधि (फोटोपीरियड) और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित किया जाता है. इससे पौधों में फूल आने और अगली पीढ़ी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में एक साल में केवल 1 या 2 फसल चक्र ही पूरे हो पाते हैं, लेकिन इस तकनीक के जरिए 4 से 5 फसल चक्र एक ही वर्ष में पूरे किए जा सकते हैं. इसका सीधा फायदा यह होगा कि शोध कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा और किसानों तक नई किस्में जल्दी पहुंचेंगी.
12 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी सुविधा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. परियोजना के तहत 12 अत्याधुनिक स्पीड ब्रीडिंग चैंबर तैयार किए जाएंगे. इन चैंबरों में आधुनिक सेंसर, नियंत्रित तापमान प्रणाली और एडवांस लाइटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे पौधों की वृद्धि को वैज्ञानिक ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा.
इस परियोजना की आधारशिला कृषि वैज्ञानिक Mangi Lal Jat ने रखी. सुविधा पूरी होने के बाद इसे दक्षिण भारत की सबसे बड़ी स्पीड ब्रीडिंग यूनिट माना जाएगा.
धान के साथ अन्य फसलों को भी मिलेगा फायदा
हालांकि यह केंद्र मुख्य रूप से धान अनुसंधान के लिए विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसका लाभ अन्य फसलों के अनुसंधान में भी मिलेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि गेहूं, दलहन, तिलहन और अन्य खाद्यान्न फसलों की नई किस्मों के विकास में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकेगा.
सबसे खास बात यह है कि यह सुविधा केवल IIRR तक सीमित नहीं रहेगी. सरकारी और निजी क्षेत्र के अन्य कृषि अनुसंधान संस्थानों को भी इसका उपयोग करने का अवसर मिलेगा. इससे देशभर में कृषि अनुसंधान को नई गति मिलने की उम्मीद है.
जीन एडिटिंग और जेनेटिक रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
स्पीड ब्रीडिंग तकनीक SpeedBreeding जीन एडिटिंग और जेनेटिक रिसर्च के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाएगी. वैज्ञानिकों के अनुसार तेजी से नई पीढ़ियां तैयार होने के कारण मैपिंग पॉपुलेशन विकसित करने और जीन आधारित शोध कार्यों में काफी समय की बचत होगी.
इस तकनीक की मदद से ऐसे बीज विकसित किए जा सकेंगे जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें, रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को बेहतर तरीके से झेल सकें. इससे भविष्य में किसानों की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा. अब उन्हें बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. तेजी से विकसित होने वाली उन्नत किस्में खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करेंगी.
इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भी यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्पीड ब्रीडिंग भारतीय कृषि अनुसंधान का एक अहम हिस्सा बन जाएगी.

