MuzaffarpurLitchi: बिहार के मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची इस बार बड़े संकट से गुजर रही है. जिले के कई इलाकों में गंधी कीट यानी स्टिंक बग के हमले ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. मीनापुर, मुसहरी, बोचहा और काटी क्षेत्र में लीची के बागानों में भारी नुकसान देखने को मिल रहा है. कहीं फूल झड़ रहे हैं, कहीं छोटे फल गिर रहे हैं तो कई जगहों पर मंजर पूरी तरह सूख चुके हैं. लगातार बदलते मौसम और कीटों के बढ़ते प्रकोप ने लीची उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है.
किसानों का कहना है कि इस बार मौसम शुरू से ही अनुकूल नहीं रहा. पहले असमय बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव ने फसल को कमजोर किया, फिर स्टिंक बग के हमले ने हालात और बिगाड़ दिए. कई किसानों ने कीटनाशकों का छिड़काव भी कराया, लेकिन कीटों पर प्रभाव नहीं पड़ रहा. इससे किसानों की लागत बढ़ती जा रही है और उत्पादन लगातार घट रहा है.
कई इलाकों में 90 प्रतिशत तक नुकसान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. प्रधान लीची विज्ञानी डॉ. बिनोद कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने कई व्यावसायिक बागों का निरीक्षण किया. जांच के दौरान सामने आया कि कई बागों में 40 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुंचा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में 90 प्रतिशत तक लीची की फसल बर्बाद हो चुकी है.
वैज्ञानिकों ने पाया कि फूल आने और शुरुआती फल विकास के समय स्टिंक बग का हमला सबसे ज्यादा हुआ. इस कीट ने मंजर और छोटे फलों का रस चूस लिया, जिससे फल सूखने लगे और समय से पहले गिर गए. निरीक्षण के दौरान कई पेड़ों पर ऐसे मंजर मिले जिनमें फल बिल्कुल नहीं थे.
क्या है स्टिंक बग और कैसे करता है नुकसान?
स्टिंक बग (StinkBugAttack) एक बेहद नुकसानदायक कीट माना जाता है. यह लीची के फूल, कोमल पत्तियों और छोटे फलों का रस चूसता है. इसके कारण पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फल विकसित नहीं हो पाते. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कीट प्रवासी प्रकृति का होता है. यानी एक बाग में दवा छिड़काव होने पर यह आसपास के दूसरे बागों में चला जाता है और बाद में फिर लौट आता है.
डॉ. बिनोद कुमार ने बताया कि पहले इस कीट का असर पूर्वी चंपारण के मेहसी इलाके तक सीमित था, लेकिन अब यह तेजी से फैलते हुए मीनापुर और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है. उन्होंने बताया कि इस साल करीब 60 प्रतिशत बागों में फूल ही नहीं आए, जबकि जहां फूल निकले वहां स्टिंक बग ने भारी तबाही मचा दी.
किसानों के सामने आर्थिक संकट
लीची किसानों का कहना है कि इस बार उनकी हालत बेहद खराब हो गई है. बागों की देखभाल, सिंचाई, दवा और मजदूरी पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन अब उत्पादन की उम्मीद बेहद कम बची है. कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं और फसल खराब होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
किसानों ने सरकार से मुआवजे और वैज्ञानिक सहायता की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में भी लीची उत्पादन प्रभावित हो सकता है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक मशहूर है और हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है.
वैज्ञानिकों ने दी यह सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को सामूहिक रूप से कीट नियंत्रण अभियान चलाने की सलाह दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि सभी किसान एक साथ दवा छिड़काव करें तो स्टिंक बग के फैलाव को रोका जा सकता है. इसके अलावा नियमित निगरानी, साफ-सफाई और संतुलित पोषण प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है.
फिलहाल किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि मौसम सुधरे और कीटों का प्रकोप कम हो, ताकि बची हुई फसल को किसी तरह सुरक्षित किया जा सके.

