Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) ने देश में मिलेट अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जलवायु परिवर्तन, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि के दौर में “श्री अन्न” यानी मोटे अनाज को भविष्य की फसल माना जा रहा है। इसी कड़ी में आईसीएआर के अंतर्गत कार्यरत ICAR-Indian Institute of Millets Research (आईसीएआर-आईआईएमआर), हैदराबाद में स्थापित एडवांस्ड न्यूट्रिजेनोमिक्स प्रयोगशाला देश के मिलेट अनुसंधान तंत्र को और मजबूत करेगी।
6 मई 2026 को Dr. M. L. Jat ने इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मिलेट्स पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और किसानों की टिकाऊ आजीविका के लिए एक सशक्त समाधान बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आईसीएआर अगली पीढ़ी के अनुसंधान और वैज्ञानिक अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि “श्री अन्न” को वैश्विक आंदोलन बनाया जा सके।
यह प्रयोगशाला ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मिलेट्स (श्री अन्न) के तहत विकसित की गई है। यहां हाई-थ्रूपुट जीनोमिक्स पाइपलाइन, अत्याधुनिक सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म, आरएनए सीक्वेंसिंग सुविधाएं और ट्रेट मैपिंग तकनीकों जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से वैज्ञानिक ऐसे मिलेट्स विकसित कर सकेंगे जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सहन करने में सक्षम हों, पोषण से भरपूर हों और अधिक उत्पादन देने वाले हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सूखा, अत्यधिक तापमान और जल संकट जैसी चुनौतियां कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेंगी। ऐसे समय में बाजरा, ज्वार, रागी और कोदो जैसे मोटे अनाज कम पानी में बेहतर उत्पादन देने के कारण किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं। नई प्रयोगशाला इन फसलों में पोषण गुणवत्ता बढ़ाने और उत्पादन क्षमता सुधारने में अहम भूमिका निभाएगी।
प्रयोगशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रेडिक्टिव ब्रीडिंग, मार्कर-असिस्टेड ब्रीडिंग तथा जीन एडिटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इससे वैज्ञानिक कम समय में नई उन्नत किस्में विकसित कर पाएंगे। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि देश में कुपोषण की समस्या से निपटने में भी मददगार साबित हो सकती है।
निरीक्षण के दौरान डॉ. एम. एल. जाट ने एडवांस्ड फेनोमिक्स फैसिलिटी और ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मिलेट्स परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने आईसीएआर-आईआईएमआर द्वारा विश्वस्तरीय अनुसंधान ढांचा विकसित करने के प्रयासों की सराहना की। उनके अनुसार भारत मिलेट अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर Dr. C. Tara Satyavathi ने संस्थान द्वारा किसानों, महिला समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के बीच मिलेट आधारित आजीविका, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईसीएआर-आईआईएमआर देशभर में मिलेट्स को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रशिक्षण, प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने पर भी काम कर रहा है।
भारत सरकार द्वारा “श्री अन्न” को बढ़ावा देने के अभियान के बाद देश और दुनिया में मिलेट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के सहयोग से भारत न केवल मिलेट उत्पादन में अग्रणी बनेगा, बल्कि वैश्विक पोषण सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

