Coromandel International Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज करते हुए भारतीय कृषि क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत किया है। कंपनी ने 8 मई 2026 को जारी अपने वित्तीय परिणामों में बताया कि उसने उर्वरक, फसल सुरक्षा, जैव उत्पाद, विशेष पोषक तत्व, ऑर्गेनिक खाद और एग्री-रिटेल जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। साथ ही कंपनी ने एग्री-ड्रोन स्प्रेइंग और डिजिटल कृषि पहलों के जरिए टिकाऊ खेती और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उसका कुल समेकित कारोबार बढ़कर 31,827 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है। वहीं EBITDA 23 प्रतिशत बढ़कर 3,232 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का स्टैंडअलोन PAT 2,009 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। चौथी तिमाही में भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6,068 करोड़ रुपये की आय अर्जित की।
कंपनी के निदेशक मंडल ने शेयरधारकों के लिए 2 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम लाभांश को मंजूरी दी है। इससे पहले फरवरी 2026 में कंपनी 9 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश दे चुकी है। इस प्रकार पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल लाभांश 11 रुपये प्रति शेयर रहा, जो फेस वैल्यू के आधार पर 1100 प्रतिशत के बराबर है।
कंपनी ने वर्ष के दौरान अपने पोषक तत्व (Nutrient) कारोबार में उत्पादन संयंत्रों को पूर्ण क्षमता पर संचालित किया और कच्चे माल की आपूर्ति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया। इससे किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी। कंपनी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में 2000 टन प्रतिदिन क्षमता वाले सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र और 650 टन प्रतिदिन क्षमता वाले फॉस्फोरिक एसिड संयंत्र का सफलतापूर्वक संचालन शुरू किया। लगभग 1100 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ये परियोजनाएं भारत को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
कंपनी ने बताया कि सेनेगल स्थित रॉक फॉस्फेट परियोजना में भी उत्पादन बढ़ाया गया है, जिससे नए फॉस्फोरिक एसिड संयंत्र के लिए कच्चे माल की आपूर्ति मजबूत होगी। इसके अलावा काकीनाडा में उर्वरक ग्रैनुलेशन क्षमता विस्तार परियोजना भी तय समय के अनुसार आगे बढ़ रही है और इसके वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है।
फसल सुरक्षा (Crop Protection) कारोबार में भी कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कंपनी को मजबूत मांग मिली। प्रमुख तकनीकी अणुओं (Technical Molecules) से संबंधित कई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनसे कंपनी की विनिर्माण क्षमता और अधिक बढ़ेगी। कंपनी ने इस कारोबार में 16 प्रतिशत राजस्व वृद्धि और 55 प्रतिशत लाभ वृद्धि दर्ज की है।
कंपनी की सहायक इकाई NACL Industries Limited ने भी वर्ष के दौरान सफल वापसी की। परिचालन सुधारों के चलते कंपनी का राजस्व 28 प्रतिशत बढ़ा और वह फिर से लाभ में लौट आई।
कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी S. Sankarasubramanian ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद मजबूत प्रदर्शन वाला वर्ष रहा। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति बाधाओं और मुद्रा विनिमय दरों में तेज बदलाव के बावजूद कंपनी ने फॉस्फेटिक उर्वरक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की। कंपनी ने इस क्षेत्र में 7 प्रतिशत वृद्धि के साथ 4.3 मिलियन टन उर्वरकों की बिक्री की।
उन्होंने बताया कि कंपनी किसानों के साथ मजबूत जुड़ाव, नए बाजारों में विस्तार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के जरिए कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने का प्रयास कर रही है। एग्री-रिटेल कारोबार के तहत कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 300 से अधिक नए स्टोर खोले हैं, जिसके बाद उसके ग्रामीण रिटेल केंद्रों की संख्या बढ़कर 1200 हो गई है। इन केंद्रों के माध्यम से लगभग 30 लाख किसानों को कृषि इनपुट, मृदा परीक्षण, फसल सलाह और कृषि मशीनरी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
गौरतलब है कि कोरोमंडल इंटरनेशनल भारत की दूसरी सबसे बड़ी फॉस्फेटिक उर्वरक निर्माता और विपणन कंपनी है। कंपनी के पास देशभर में 21 विनिर्माण इकाइयां और 8 अनुसंधान एवं विकास केंद्र हैं। कंपनी के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे United Nations Development Programme (UNDP) और The Energy and Resources Institute (TERI) द्वारा भी सराहा जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का यह प्रदर्शन भारतीय कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, टिकाऊ खेती और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है। उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता, फसल सुरक्षा समाधान और डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार से आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

