देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र ने निर्यात के मोर्चे पर लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में MSME उत्पादों की हिस्सेदारी 2022-23 में 43.59% से बढ़कर 2024-25 में 48.55% तक पहुंच गई है। यह वृद्धि इस क्षेत्र की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और सरकार की नीतिगत पहलों का परिणाम मानी जा रही है।
एमएसएमई मंत्रालय द्वारा लागू विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य MSME उद्यमों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में मजबूत बनाना है। सरकार तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग, डिजिटल सशक्तिकरण और निर्यात प्रोत्साहन जैसे कई स्तरों पर काम कर रही है।
तकनीकी सुदृढ़ीकरण के लिए देशभर में प्रौद्योगिकी केंद्रों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। सरकार 20 नए टेक्नोलॉजी सेंटर और 100 एक्सटेंशन सेंटर स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे MSME को आधुनिक तकनीक और कौशल का लाभ मिल सके। इससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होगा।
डिजिटल क्षेत्र में भी MSME को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल अकाउंटिंग और सप्लाई चेन के डिजिटलीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत Government e-Marketplace (GeM) और Open Network for Digital Commerce (ONDC) जैसे प्लेटफॉर्म MSME के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।
हरित और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने के लिए सरकार ने MSE-GIFT योजना शुरू की है, जिसके तहत MSME को 2% ब्याज सब्सिडी के साथ सस्ती वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इससे ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।
हाल ही में किए गए GST सुधारों से भी MSME को बड़ा लाभ मिला है। कम कर दरों के कारण कच्चे माल और सेवाओं की लागत घटी है, जिससे छोटे उद्यमों को अपने कारोबार का विस्तार करने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल रही है।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने क्रेडिट गारंटी योजना को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड द्वारा 20,000 करोड़ रुपये तक के बिना गारंटी ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे MSME निर्यातकों को वित्तीय मजबूती मिलेगी और वे नए बाजारों में विस्तार कर सकेंगे।
इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग योजना के तहत MSME को विदेशी प्रदर्शनियों, मेलों और व्यापारिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर दिया जा रहा है। इससे उन्हें वैश्विक बाजार की समझ और नेटवर्किंग का लाभ मिलता है।
सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल “निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM)” है, जिसके लिए 2025-26 से 2030-31 तक 25,060 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह मिशन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और डिजिटल रूप से संचालित ढांचा प्रदान करता है।
EPM दो प्रमुख भागों में कार्य करेगा—“निर्यात प्रोत्साहन” और “निर्यात दिशा”। पहला भाग MSME को सस्ती वित्तीय सहायता, क्रेडिट गारंटी और ई-कॉमर्स निर्यात के लिए सुविधाएं प्रदान करता है, जबकि दूसरा भाग गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और बाजार विस्तार पर केंद्रित है।
राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि ये सभी पहलें MSME को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही हैं और भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कुल मिलाकर, MSME क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है। सरकार की योजनाओं और लगातार बढ़ते निर्यात के चलते यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख चालक साबित हो सकता है।

