वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (निस्पर) ने विज्ञान संचार को सशक्त बनाने और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) नीति में सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विज्ञान नगरी आंध्र प्रदेश (एससीएपी) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने और समाज में विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
यह समझौता आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संपन्न हुआ, जिसमें दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। निस्पर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम, आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव एम.टी. कृष्ण बाबू तथा एससीएपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकटेश्वरलू केसिनैनी ने औपचारिक रूप से इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर निस्पर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. योगेश सुमन और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एन.के. प्रसन्ना को इस साझेदारी के तहत प्रस्तावित गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर विज्ञान संचार के क्षेत्र में व्यापक पहल करेंगे। इसका उद्देश्य न केवल वैज्ञानिक जानकारी को आम जनता तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर समाज में जागरूकता भी बढ़ाना है। इसके साथ ही एसटीआई नीति अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से सरकार को बेहतर और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
एमओयू के प्रमुख लाभों में आंध्र प्रदेश में विज्ञान संचार और वैज्ञानिक जागरूकता को सुदृढ़ करना, नीति निर्माण में शोध-आधारित सहयोग को बढ़ावा देना और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण शामिल है। इसके अलावा, ज्ञान साझा करने, संयुक्त शोध प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने और शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इनमें विज्ञान संचार और एसटीआई नीति से जुड़े अनुसंधान परियोजनाएं, सेमिनार, कार्यशालाएं, सम्मेलन और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शैक्षिक एवं प्रशिक्षण सामग्री का विकास, छात्रों और शोधार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करना तथा वैज्ञानिक पत्रिकाओं और ज्ञान संसाधनों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
विशेष रूप से, यह सहयोग सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप जागरूकता अभियानों को भी बढ़ावा देगा। इससे समाज के विभिन्न वर्गों को विज्ञान और नवाचार के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सकेगा और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आंध्र प्रदेश में एक मजबूत, ज्ञान-आधारित और नवाचार-उन्मुख वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से विज्ञान, नीति और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जिससे राज्य और देश के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।
कुल मिलाकर, सीएसआईआर-निस्पर और विज्ञान नगरी आंध्र प्रदेश के बीच हुआ यह समझौता विज्ञान संचार, अनुसंधान और नीति निर्माण के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा।

