उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्थानीय व्यवसायों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय ने नागालैंड सरकार और नागा व्यापार संघ (बीएएन) के सहयोग से डिमापुर के पुराना बाजार स्थित सेडेन रिजू में उद्यमी जागरूकता शिविर और विशेष विक्रेता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक आकांक्षी और मौजूदा उद्यमियों ने भाग लिया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विशेष रूप से राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (एनएसएसएच) योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाना और एससी/एसटी उद्यमियों को सशक्त बनाना था। कार्यक्रम के माध्यम से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) की मांग और स्थानीय उद्यमों की आपूर्ति क्षमता के बीच की दूरी को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ संयुक्त सचिव मर्सी एपाव, बीएएन के अध्यक्ष एल. मॉंगकुम जामिर तथा केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
उद्घाटन सत्र में एनएसआईसी के जोनल जनरल मैनेजर राजेश मदन ने सार्वजनिक खरीद नीति की जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी खरीद में एससी/एसटी उद्यमों के लिए 4% और महिला उद्यमों के लिए 3% हिस्सेदारी अनिवार्य की गई है। उन्होंने कहा कि यह नीति समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संयुक्त सचिव मर्सी एपाव ने अपने संबोधन में एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं जैसे पीएमईजीपी, पीएम विश्वकर्मा, एमएसई-सीडीपी, जेड सर्टिफिकेशन और विपणन सहायता योजनाओं के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र कृषि के बाद देश में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है और यह जीडीपी, विनिर्माण और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
एमएसएमई सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और विशेष रूप से युवा और महिला उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इससे नए व्यवसाय अवसर और रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें भाग लेने वाले उद्यमियों को मौके पर ही “उद्यम पंजीकरण” कराने की सुविधा भी प्रदान की गई। इससे नए उद्यमियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने और सरकारी लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी।
तकनीकी सत्रों के दौरान बैंकों, सीपीएसई और एमएसएमई-डीएफओ के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों को वित्तीय सहायता, लोन प्रक्रिया, और विक्रेता पंजीकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस इंटरैक्टिव मंच ने उद्यमियों को सीधे विशेषज्ञों से संवाद करने और अपनी समस्याओं के समाधान प्राप्त करने का अवसर दिया।
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि उद्यमियों और सरकारी संस्थाओं के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने में भी सहायक साबित हुआ। इससे नागालैंड जैसे राज्यों में स्थानीय व्यवसायों को नई दिशा मिलने और रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है।

