कृषि नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए बंदगोभी की कटाई हेतु एक उन्नत मशीन विकसित की है। इस मशीन का उद्देश्य खेतों में श्रम की जरूरत को कम करना, उत्पादन प्रक्रिया को तेज बनाना और लागत में उल्लेखनीय बचत सुनिश्चित करना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मशीन के व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने के बाद बंदगोभी उगाने वाले किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कटाई की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हो जाएगी।
विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में करीब पाँच वर्षों के शोध, परीक्षण और फील्ड ट्रायल के बाद यह मशीन तैयार की गई है। वर्ष 2019 में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पी.के. प्रणव के नेतृत्व में इसका प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, जो 2023 में पूरा हुआ। विश्वविद्यालय ने हाल ही में इसे किसान मेले में प्रदर्शित किया, जहाँ बड़ी संख्या में किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने इस तकनीक में रुचि दिखाई।
मशीन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह 12 वोल्ट की बैटरी से संचालित होती है और एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर लगभग पाँच घंटे तक लगातार काम कर सकती है। इसे हल की तरह खेत में चलाया जाता है, जिससे किसान बिना अधिक मेहनत किए बंदगोभी की तेजी से कटाई कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार मशीन एक घंटे में 207 से 221 बंदगोभी काटने की क्षमता रखती है, जो पारंपरिक तरीके की तुलना में कई गुना तेज है। इससे कटाई का समय कम होने के साथ-साथ खेत में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या भी घट जाएगी।
इस मशीन का एक और तकनीकी लाभ इसका कन्वेयर बेल्ट आधारित स्टोरेज सिस्टम है। कटर ब्लेड द्वारा कटाई होते ही बंदगोभी सीधे कन्वेयर के जरिए स्टोरेज बॉक्स या टोकरी में पहुंच जाती है। इससे किसानों को बार-बार झुककर गोभी उठाने की जरूरत नहीं पड़ती, जो न केवल श्रम घटाता है बल्कि कटाई की गति भी बढ़ाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार झुककर काम करने से किसानों पर पड़ने वाला शारीरिक दबाव भी इस मशीन से काफी कम होगा।
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विश्लेषण के मुताबिक मशीन के उपयोग से प्रति हेक्टेयर 15 प्रतिशत तक लागत में बचत संभव है। इसका अर्थ है कि एक हेक्टेयर में किसानों को लगभग 2500 रुपये तक की बचत मिलेगी, जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है। बंदगोभी सहित सब्ज़ियों की कटाई में बढ़ती मजदूरी लागत को देखते हुए यह मशीन बाजार में आने पर किसानों के लिए एक किफायती समाधान साबित हो सकती है।
फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से मशीन के पेटेंट और व्यावसायिक उत्पादन से जुड़े कार्य पूरे किए जा रहे हैं। अनुमान है कि आने वाले महीनों में इसे बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपये के आसपास हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी किफायती कीमत पर उपलब्ध होने से यह मशीन बड़े पैमाने पर किसानों तक आसानी से पहुंच सकेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह मशीन विशेष रूप से बिहार की कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है और फील्ड परीक्षणों में यह पूर्णतः सफल साबित हुई है। कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय लगातार किसानों की जरूरतों को समझते हुए नई तकनीकें विकसित करने पर काम कर रहा है और आने वाले समय में कई और आधुनिक कृषि उपकरण किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
पूसा विश्वविद्यालय की यह नवीन पहल न केवल बंदगोभी की कटाई को आसान बनाएगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी संभावनाओं को भी मजबूत करेगी। किसानों के लिए यह मशीन निश्चित रूप से एक बड़ी राहत लेकर आएगी।

