देश में हवाई यात्रा को सस्ता, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। अब विमान में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के नियमों में बदलाव करते हुए इसमें सिंथेटिक फ्यूल की ब्लेंडिंग की अनुमति दे दी गई है। इस फैसले का असर आने वाले समय में एयरलाइंस के खर्च, टिकट की कीमतों और प्रदूषण के स्तर—तीनों पर देखने को मिल सकता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 17 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब पारंपरिक ATF के साथ सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन आधारित फ्यूल को मिलाने की इजाजत दी गई है। आसान भाषा में कहें तो अब एविएशन फ्यूल सिर्फ क्रूड ऑयल से बने पारंपरिक ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आधुनिक और अपेक्षाकृत साफ फ्यूल का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस बदलाव को इंडियन स्टैंडर्ड IS 1571 और IS 17081 के तहत लागू किया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत एथेनॉल जैसे वैकल्पिक और पर्यावरण के लिए बेहतर माने जाने वाले तत्वों की ब्लेंडिंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी और भारत का एविएशन सेक्टर सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।
सरकार ने इस संशोधन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू किया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। यानी अब एयरलाइंस और तेल कंपनियां नए नियमों के अनुसार काम शुरू कर सकती हैं। इसके साथ ही पुराने नियमों में मौजूद कुछ अप्रासंगिक प्रावधानों और संदर्भों को हटाकर व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट और आधुनिक बनाया गया है। जांच और जब्ती से जुड़े नियमों को भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुरूप अपडेट किया गया है, ताकि कानूनी प्रक्रियाएं सरल और पारदर्शी बन सकें।
इस बीच, सरकार ATF की ऊंची कीमतों को लेकर भी चिंतित नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय विभिन्न राज्यों के साथ ATF पर लगने वाले वैट (VAT) को कम करने के मुद्दे पर चर्चा कर रहा है। इस बातचीत में दिल्ली, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य शामिल हैं।
अगर राज्यों द्वारा (ATF)पर वैट में कटौती की जाती है, तो इससे एयरलाइंस के ऑपरेशनल खर्च में कमी आएगी। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिल सकता है, क्योंकि टिकट की कीमतें घटने की संभावना बढ़ जाएगी। कुल मिलाकर, फ्यूल ब्लेंडिंग की अनुमति और टैक्स में संभावित राहत—दोनों मिलकर हवाई यात्रा को आम लोगों के लिए ज्यादा किफायती बना सकते हैं।
सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर देश के एविएशन सेक्टर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।


