भारत ने सतत विकास और आधुनिक शासन व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए “भविष्य के लिए तैयार इको-सिस्टम हेतु भू-स्थानिक आधारों को आगे बढ़ाना” विषय पर अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ मंच की मेजबानी की। इस मंच में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए Narendra Bhushan, सचिव, भूमि संसाधन विभाग ने कहा कि आज के दौर में भू-स्थानिक (Geospatial) सूचना केवल तकनीकी साधन नहीं, बल्कि प्रभावी और भविष्य के लिए तैयार शासन की आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सटीक और विश्वसनीय डेटा सिस्टम सरकारों को कृषि, शहरी विकास, जलवायु परिवर्तन, परिवहन और भूमि प्रशासन जैसे क्षेत्रों में बेहतर और त्वरित निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं।
भू-स्थानिक डेटा बना नीति निर्माण का आधार
इस मंच के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि भू-स्थानिक प्रणालियां अब इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, पर्यावरण प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवा वितरण में अहम भूमिका निभा रही हैं।
United Nations Committee of Experts on Global Geospatial Information Management (UN-GGIM) द्वारा विकसित वैश्विक ढांचे जैसे IGIF, GGRF, GSGF और FELA को देशों के लिए मार्गदर्शक बताया गया, जो राष्ट्रीय स्तर पर डेटा एकीकरण और संस्थागत समन्वय को मजबूत करते हैं।
भारत के प्रयासों को सराहा गया
भारत की राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताते हुए इसे एक खुले और नवाचार-आधारित इको-सिस्टम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कैसे Digital India Land Records Modernization Programme, SVAMITVA Scheme और डिजिटल मैपिंग जैसी पहलें भूमि अभिलेखों और संपत्ति स्वामित्व प्रणाली को पारदर्शी और आधुनिक बना रही हैं।
ड्रोन और GIS से बदल रहा भूमि प्रबंधन
ड्रोन सर्वेक्षण, हवाई मैपिंग और GIS प्लेटफॉर्म के उपयोग से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड, प्लानिंग और संपत्ति दस्तावेजीकरण में सुधार हो रहा है।
इस दौरान “इंटीग्रेटेड लैंड स्टैक” की अवधारणा पर भी चर्चा हुई, जो विभिन्न भूमि संबंधी डेटा को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर शासन और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाती है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यक्रम में S K Sinha और Victor Khoo सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया।
विशेषज्ञों ने जलवायु अनुकूलन, आपदा प्रबंधन, तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, शहरी विस्तार और कृषि स्थिरता जैसे मुद्दों पर क्षेत्रीय सहयोग को जरूरी बताया।
एशिया-प्रशांत सहयोग को मिलेगा बल
इस मंच ने देशों के बीच अनुभव साझा करने, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने और बेहतर प्रथाओं को अपनाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
प्रतिभागियों ने विश्वास जताया कि इस तरह के सहयोग से भविष्य में अधिक एकीकृत, नागरिक-केंद्रित और प्रभावी भू-स्थानिक सिस्टम विकसित किए जा सकेंगे।
नई दिल्ली में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय मंच इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल तकनीकी नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाकर सतत विकास और बेहतर शासन की दिशा में भी मजबूत कदम उठा रहा है।

