कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए कृषि क्षेत्र की रणनीति को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक Atish Chandra, सचिव, Department of Agriculture and Farmers Welfare की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें झारखंड राज्य के लिए वार्षिक कार्ययोजना (Annual Action Plan – AAP) के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड में कृषि विकास को गति देना, किसानों की आय बढ़ाना और राज्य की विशिष्ट कृषि चुनौतियों के अनुरूप योजनाओं को अंतिम रूप देना था। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया और राज्य की कृषि स्थिति, संसाधनों और संभावनाओं का व्यापक आकलन किया।
बैठक में विशेष रूप से झारखंड की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया। राज्य में वर्षा आधारित खेती का अधिक प्रचलन है, जिसके चलते जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता देने की बात कही गई। इसके अलावा, फसल विविधीकरण, उन्नत बीजों का उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर भी बल दिया गया।
सचिव अतिश चंद्रा ने कहा कि वार्षिक कार्ययोजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की समग्र भलाई सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाएं जमीनी हकीकत के अनुरूप हों और उनका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से ही कृषि क्षेत्र में अपेक्षित सुधार संभव है।
बैठक के दौरान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि जैविक खेती, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) और समेकित कीट प्रबंधन (IPM) को बढ़ावा देकर उत्पादन को पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है।
इसके साथ ही, किसानों को बाजार से जोड़ने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (value addition) और भंडारण एवं प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। इससे न केवल किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि कृषि उत्पादों की बर्बादी भी कम होगी।
बैठक में डिजिटल कृषि और तकनीकी हस्तक्षेपों के उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन, सैटेलाइट डेटा और मोबाइल आधारित कृषि सेवाओं के माध्यम से किसानों को सटीक और समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि होगी।
अंत में, सचिव अतिश चंद्रा ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे तय समयसीमा के भीतर AAP प्रस्तावों को अंतिम रूप दें और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह कार्ययोजना झारखंड के किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगी और राज्य के कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा देगी।
यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से झारखंड के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

