भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए Indian Council of Agricultural Research के महानिदेशक एवं Dr. M. L. Jat ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने और जैविक व सूक्ष्मजीवी (माइक्रोबियल) इनपुट्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया। यह बात उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, लखनऊ के दौरे के दौरान कही। उनके साथ Dr. J. K. Jena भी मौजूद रहे।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना और बागवानी क्षेत्र में टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान गणमान्य अतिथियों ने हाल ही में विकसित आम की नई किस्म ‘आवध-अभया’ का रोपण किया। यह किस्म बेहतर उत्पादकता और उच्च गुणवत्ता वाले फलों के लिए विकसित की गई है, जो निर्यात की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की बायो-कंट्रोल प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया, जहां पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद जैसे ICAR फ्यूसिकॉन्ट, ग्रो-श्योर, ट्राइकोडर्मा हार्ज़ियानम और ब्यूवेरिया बैसियाना का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। ये उत्पाद रासायनिक कीटनाशकों का सुरक्षित विकल्प प्रदान करते हैं और फसलों को बिना अवशेष (residue-free) के सुरक्षित रखते हैं। इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
इस अवसर पर आयोजित संवाद सत्र में CISH से जुड़े उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), एग्री-स्टार्टअप्स और प्रगतिशील आम उत्पादकों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि ICAR द्वारा विकसित तकनीकों का जमीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। किसानों ने विशेष रूप से कैनोपी प्रबंधन (canopy management) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, जिससे निर्यात गुणवत्ता के आम उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।
साथ ही, प्रतिभागियों ने यह भी सुझाव दिया कि निम्न-ग्रेड फलों के बेहतर उपयोग के लिए प्रसंस्करण (processing) अवसंरचना को मजबूत किया जाना चाहिए। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं और फसल की बर्बादी भी कम होगी।
अपने संबोधन में डॉ. जाट ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा—“हमारे प्रयास वास्तव में किसानों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहे हैं?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान और नवाचार तभी सार्थक हैं, जब उनका सीधा लाभ किसानों को मिले। उन्होंने आश्वासन दिया कि ICAR उद्यमियों और किसानों को न केवल तकनीकी बल्कि नीतिगत स्तर पर भी पूरा सहयोग देगा।
डॉ. जाट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रहा है और दीर्घकालीन उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है। इसके समाधान के रूप में उन्होंने जैविक खाद, वर्मी-कम्पोस्ट, और सूक्ष्मजीवी उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने की अपील की। उनके अनुसार, यह न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखेगा बल्कि किसानों की लागत को भी कम करेगा और उन्हें बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में मदद करेगा।
अंत में, उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि वे मांग-आधारित (demand-driven) और प्रभावशाली समाधान विकसित करें, जो सीधे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने में योगदान दें। यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि भविष्य की कृषि नीति में पर्यावरण संरक्षण, गुणवत्ता उत्पादन और किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता होंगे।

