केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कर्नाटक के डोड्डाबल्लापुर में 100 बिस्तरों वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अस्पताल का उद्घाटन करते हुए श्रमिकों की राष्ट्र-निर्माण में अहम भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “श्रमिक ही राष्ट्र के सच्चे निर्माता और हमारे विश्वकर्मा हैं,” और उनके कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मांडविया ने डोड्डाबल्लापुर से ही वर्चुअल माध्यम से कर्नाटक के बेल्लारी में एक और 100-बिस्तर वाले ESIC अस्पताल की आधारशिला भी रखी। इस पहल को राज्य में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे और सांसद के. सुधाकर भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में डॉ. मांडविया ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सशक्तिकरण और सम्मान को शासन के केंद्र में रखा गया है।
उन्होंने पिछले दशक में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय विस्तार का जिक्र करते हुए बताया कि ESIC के तहत बीमित व्यक्तियों की संख्या लगभग 2 करोड़ से बढ़कर 4 करोड़ से अधिक हो गई है। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर अब 64 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जो भारत की बड़ी उपलब्धि है।
श्रम सुधारों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। अब नियुक्ति पत्र अनिवार्य किए गए हैं, पुरुषों और महिलाओं के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया गया है और जोखिम भरे कार्यों में लगे श्रमिकों को ESIC कवरेज की गारंटी दी गई है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए डॉ. मांडविया ने बताया कि 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए 7 मई से देशभर में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया जाएगा। यह अभियान ESIC अस्पतालों में संचालित होगा, जिसका उद्देश्य बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना और श्रमिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
नवउद्घाटित डोड्डाबल्लापुर अस्पताल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र कपड़ा उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जहां 15 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक कार्यरत हैं। इस अस्पताल के माध्यम से उनके परिवारों सहित लगभग 55 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। यह अस्पताल पूरी तरह मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे श्रमिकों और उनके आश्रितों को बड़ी राहत मिलेगी।
यह आधुनिक अस्पताल 5 एकड़ भूमि पर लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और इसमें ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, स्त्री एवं बाल रोग, अस्थि रोग, दंत चिकित्सा और उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। वहीं, बेल्लारी में बनने वाला नया अस्पताल लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मांडविया ने अस्पताल निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया और ESIC लाभार्थियों को लाभ भी वितरित किए। उन्होंने दोहराया कि सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
कुल मिलाकर, यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का प्रतीक है, बल्कि श्रमिकों के सम्मान और उनके योगदान को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

