गुरुग्राम क्षेत्र में किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत ICAR-Indian Agricultural Research Institute के वैज्ञानिकों ने “मेरा गांव–मेरा गौरव” कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों के साथ संवाद स्थापित किया। यह कार्यक्रम संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान का हिस्सा था, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य के महत्व और सही पोषण प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।
इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ सीधे संवाद करते हुए उनकी खेती से जुड़ी समस्याओं को समझा और समाधान सुझाए। कार्यक्रम में मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन (Soil Test Based Nutrient Management) पर विशेष जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि बिना मिट्टी की जांच के उर्वरकों का प्रयोग करना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी गिरती जाती है।
चर्चा के दौरान संतुलित उर्वरक उपयोग (Balanced Fertilizer Use) को खेती की सफलता का आधार बताया गया। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्वों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) का संतुलित प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरकों का उपयोग लागत बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है।
इसके साथ ही, जैव उर्वरकों (Biofertilisers) के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि जैव उर्वरक न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भी सुधार करते हैं। यह एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प है, जो दीर्घकालिक खेती को टिकाऊ बनाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने इस पहल को बेहद उपयोगी बताया। कई किसानों ने स्वीकार किया कि वे अब तक पारंपरिक तरीकों से उर्वरकों का उपयोग कर रहे थे, लेकिन अब वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित उपयोग अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं। किसानों ने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें नई तकनीकों को समझने और अपनाने में मदद करते हैं।
वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी दी। साथ ही, उन्होंने खेत स्तर पर प्रदर्शन के माध्यम से यह दिखाया कि किस प्रकार वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। “मेरा गांव–मेरा गौरव” कार्यक्रम के माध्यम से Indian Council of Agricultural Research का यह प्रयास यह दर्शाता है कि जब वैज्ञानिक सीधे किसानों के बीच पहुंचते हैं, तो ज्ञान का प्रभावी आदान-प्रदान संभव होता है। इससे खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
अंततः, यह पहल न केवल किसानों को जागरूक कर रही है, बल्कि भारतीय कृषि को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में इस तरह के कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

