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Home कृषि समाचार

खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोत्तरी: किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

सरकार ने MSP व्यवस्था के जरिए किसानों को होने वाले लाभ के आंकड़े भी साझा किए हैं। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान धान की कुल खरीद 8418 लाख मीट्रिक टन (LMT) रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह आंकड़ा 4590 LMT था

Vipin Mishra by Vipin Mishra
May 16, 2026
in कृषि समाचार
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खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोत्तरी: किसानों को मिलेगा बेहतर दाम
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प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना और खेती को अधिक लाभदायक बनाना है।

सरकार द्वारा घोषित नए MSP में सबसे अधिक बढ़ोत्तरी सूरजमुखी बीज के लिए की गई है। सूरजमुखी के MSP में ₹622 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इसके बाद कपास में ₹557 प्रति क्विंटल, नाइजरसीड में ₹515 प्रति क्विंटल और तिल में ₹500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को तिलहन और नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MSP में यह बढ़ोतरी यूनियन बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें फसलों का MSP ऑल इंडिया वेटेड एवरेज कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन का कम से कम डेढ़ गुना तय करने की बात कही गई थी। इसी नीति के तहत किसानों को उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन 2026-27 में किसानों को सबसे अधिक लाभ मार्जिन मूंग की खेती में मिलने का अनुमान है। मूंग पर किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले लगभग 61 प्रतिशत लाभ मिल सकता है। इसके अलावा बाजरा और मक्का पर 56 प्रतिशत तथा तूर या अरहर पर 54 प्रतिशत मार्जिन मिलने की संभावना जताई गई है। बाकी खरीफ फसलों में भी किसानों को लागत पर लगभग 50 प्रतिशत लाभ मिलने का अनुमान है।

पिछले कुछ वर्षों में सरकार अनाज के साथ-साथ दालों, तिलहनों और न्यूट्री-सीरियल यानी श्री अन्ना की खेती को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रही है। इसी रणनीति के तहत इन फसलों के MSP में अपेाकृत अधिक बढ़ोतरी की जा रही है, ताकि किसान पारंपरिक फसलों के अलावा पोषणयुक्त और बाजार में अधिक मांग वाली फसलों की ओर आकर्षित हों। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश में खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और खाद्य तेलों तथा दालों के आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

सरकार ने MSP व्यवस्था के जरिए किसानों को होने वाले लाभ के आंकड़े भी साझा किए हैं। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान धान की कुल खरीद 8418 लाख मीट्रिक टन (LMT) रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह आंकड़ा 4590 LMT था। इससे स्पष्ट होता है कि पिछले एक दशक में सरकारी खरीद व्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इसी तरह 14 खरीफ फसलों की कुल खरीद 2014-15 से 2025-26 के दौरान 8746 LMT रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह 4679 LMT थी। इससे किसानों को MSP का अधिक लाभ मिलने की बात सामने आती है।

किसानों को MSP के तहत मिलने वाली राशि में भी बड़ा इजाफा हुआ है। 2014-15 से 2025-26 के दौरान धान उत्पादक किसानों को लगभग 16.08 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि केवल 4.44 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं 14 खरीफ फसल उत्पादक किसानों को पिछले 11 वर्षों में कुल 18.99 लाख करोड़ रुपये का MSP भुगतान किया गया, जबकि इससे पहले के 10 वर्षों में यह आंकड़ा 4.75 लाख करोड़ रुपये था।

विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में यह बढ़ोतरी किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है। खासतौर पर दालों, तिलहनों और मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा मिलने से देश की पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

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