Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises की ‘ट्रेड इनेबलमेंट एंड एक्सेस टू मार्केट (टीईएएम)’ पहल देशभर के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था के नए द्वार खोल रही है। विश्व बैंक समर्थित ‘रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (आरएएमपी)’ कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का काम कर रही है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यम अब डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से देशभर में अपने उत्पाद बेचने में सक्षम हो रहे हैं।
टीईएएम पहल का संचालन National Small Industries Corporation द्वारा किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे व्यवसायों को Open Network for Digital Commerce यानी ओएनडीसी से जोड़कर उन्हें डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है। यह पहल केवल ऑनलाइन पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑनबोर्डिंग, कैटलॉगिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल भुगतान और ग्राहक प्रबंधन जैसी संपूर्ण ई-कॉमर्स सेवाओं में संस्थागत सहायता प्रदान करती है।
देश के लाखों छोटे उद्यमी लंबे समय से सीमित बाजार, परिवहन समस्याओं और खरीदारों तक सीधी पहुंच न होने जैसी चुनौतियों से जूझते रहे हैं। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के उत्पाद अक्सर स्थानीय मंडियों तक ही सीमित रह जाते थे। लेकिन टीईएएम पहल इन बाधाओं को तोड़ते हुए छोटे व्यवसायों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम बन रही है।
इस पहल की सफलता का एक उल्लेखनीय उदाहरण जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के पचारी गांव स्थित बाबा संकरी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) है। यह संगठन प्रीमियम गुणवत्ता वाले अखरोट उत्पादन के लिए जाना जाता है। पहले इस एफपीओ की बाजार पहुंच सीमित थी क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण खरीदारों से सीधा संपर्क स्थापित करना कठिन था। लेकिन टीईएएम पहल से जुड़ने के बाद स्थिति तेजी से बदली।
टीईएएम के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के केवल दो महीनों के भीतर बाबा संकरी एफपीओ ने पूरे देश से 100 से अधिक ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरे किए। अब उनके उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों में ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। डिजिटल भुगतान प्रणाली जुड़ने से समय पर भुगतान सुनिश्चित हुआ और किसानों को भुगतान में होने वाली देरी से राहत मिली। इससे एफपीओ से जुड़े किसानों की आय में सुधार हुआ और उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ।
बाबा संकरी एफपीओ की कहानी यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण उद्यमों को सही तकनीकी और विपणन सहायता मिले तो वे भौगोलिक सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
इसी तरह उत्तर-पूर्व भारत के मणिपुर राज्य का ‘कांगलेई फूड्स’ भी टीईएएम पहल से लाभान्वित होने वाले उद्यमों में शामिल है। बिष्णुपुर स्थित इस उद्यम का संचालन श्री कोइजाम सनाहल द्वारा किया जा रहा है। पहले इस व्यवसाय को परिवहन और बाजार संपर्क जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन टीईएएम के तहत उपलब्ध लॉजिस्टिक्स सहायता और डोरस्टेप शिपमेंट पिकअप सेवाओं ने इसके कारोबार को नई गति दी।
अब कांगलेई फूड्स को उत्तर-पूर्व के बाहर देश के विभिन्न राज्यों से नियमित ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं। उद्यम ने लगातार आय वृद्धि दर्ज की है और अब यह दूरदराज के क्षेत्रों में भी ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचा रहा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि डिजिटल वाणिज्य और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क किस प्रकार छोटे व्यवसायों के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार कर सकते हैं।
टीईएएम पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों, गांवों और दूरस्थ इलाकों के उद्यमियों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। कारीगर, घर-आधारित उद्यमी, महिला स्वयं सहायता समूह, स्थानीय निर्माता और छोटे खुदरा विक्रेता अब ऑनलाइन बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओएनडीसी आधारित डिजिटल कॉमर्स मॉडल छोटे व्यवसायों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। पारंपरिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जहां छोटे विक्रेताओं को अधिक कमीशन और तकनीकी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, वहीं ओएनडीसी इंटरऑपरेबल नेटवर्क के माध्यम से प्रवेश बाधाओं को कम करता है और छोटे कारोबारियों को अधिक अवसर प्रदान करता है।
टीईएएम पहल के तहत उद्यमों को उत्पाद सूची तैयार करने, आकर्षक कैटलॉग बनाने, ग्राहक सेवा संभालने, पैकेजिंग मानकों को समझने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जुड़ने में मदद दी जाती है। इससे छोटे व्यवसाय पेशेवर तरीके से बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो रहे हैं।
सरकार का मानना है कि डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से छोटे उद्यमों की पहुंच बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति मिलेगी। यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जहां पारंपरिक बाजार व्यवस्था सीमित है।
टीईएएम पहल आने वाले समय में भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर छोटे उद्यम अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। सरकार की यह पहल ग्रामीण भारत के उद्यमियों को तकनीक और बाजार से जोड़कर समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

