भारत में टिकाऊ और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए IPL Biologicals Limited ने गुजरात के वडोदरा में अपनी तीसरी बायोलॉजिकल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया है। करीब 200 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार इस अत्याधुनिक प्लांट के शुरू होने के साथ ही कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 7,000 किलोलीटर प्रतिवर्ष हो जाएगी।
कंपनी का कहना है कि यह नया प्लांट न सिर्फ भारत में बायोलॉजिकल कृषि समाधानों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा, बल्कि देश को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद करेगा।
12 एकड़ में फैला आधुनिक प्लांट
वडोदरा में स्थापित यह नई फैसिलिटी लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई है और इसका कुल फ्लोर स्पेस करीब 2 लाख वर्ग फीट है।
यह प्लांट मुख्य रूप से बायोफर्टिलाइजर, बायोपेस्टीसाइड और फसल स्वास्थ्य से जुड़े जैविक उत्पादों का निर्माण करेगा। कंपनी के अनुसार, इस यूनिट में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड हार्वेस्टिंग और ट्रांसफर सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
कंपनी का दावा है कि यह प्लांट आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस
नई फैसिलिटी की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण अनुकूल संचालन है। कंपनी ने बताया कि यह प्लांट 40,000 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले ज़ीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज सिस्टम के साथ काम करता है। यानी उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले तरल अपशिष्ट का पूरी तरह पुनर्चक्रण किया जाएगा और किसी प्रकार का प्रदूषण बाहरी वातावरण में नहीं छोड़ा जाएगा।
इसके अलावा प्लांट में 500 किलोवाट क्षमता की कैप्टिव सोलर पावर यूनिट भी स्थापित की गई है, जिससे ऊर्जा की जरूरतों का एक हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा किया जाएगा।
कंपनी ने कहा कि यह यूनिट ISO 9001:2015 प्रमाणन के साथ संचालित होगी और इसके पास IMO, इंडोसर्ट तथा OMRI जैसे ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन भी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैविक उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को प्रमाणित करते हैं।
हरिद्वार में पहले से मौजूद हैं दो प्लांट
IPL Biologicals Limited की दो अन्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पहले से हरिद्वार, उत्तराखंड में संचालित हो रही हैं। वडोदरा में तीसरे प्लांट की शुरुआत को कंपनी अपने विस्तार अभियान का महत्वपूर्ण चरण मान रही है।
कंपनी के प्रेसिडेंट हर्षवर्धन भागचंदका ने कहा कि यह यूनिट कंपनी के फेज-1 एक्सपेंशन प्लान का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने इस परियोजना में 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है और अगले चरण में 210 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने की भी योजना बनाई गई है।
सरकार की नीति के अनुरूप विस्तार
कंपनी का कहना है कि यह विस्तार केंद्र सरकार के उस विजन के अनुरूप है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
पिछले कुछ वर्षों में सरकार प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और बायोलॉजिकल इनपुट्स को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। ऐसे में बायोफर्टिलाइजर और बायोपेस्टीसाइड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि बायोलॉजिकल उत्पाद मिट्टी की सेहत सुधारने, फसल की गुणवत्ता बढ़ाने और रासायनिक अवशेषों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
40 प्रतिशत बढ़ा कंपनी का कारोबार
कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसका कारोबार लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 290 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इस वृद्धि के पीछे बायोलॉजिकल कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग और किसानों के बीच इनके प्रति बढ़ती जागरूकता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
नई फैसिलिटी के जरिए कंपनी भारत के मध्य और दक्षिणी राज्यों के साथ-साथ निर्यात बाजारों की मांग को भी पूरा करेगी।
कंपनी ने बताया कि वह वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है और फिलहाल 15 देशों में अपने उत्पादों के पंजीकरण की प्रक्रिया चला रही है।
किसानों को मिलेगा बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरणीय समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
ऐसे में बायोलॉजिकल कृषि उत्पाद किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
कंपनी के CMD महेश भागचंदका ने कहा कि यदि भारत में बायोलॉजिकल उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ता है, तो इससे देश का फर्टिलाइजर सब्सिडी बोझ कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों के बीच बायोलॉजिकल उत्पादों को तेजी से अपनाने के लिए उद्योग-अनुकूल नीतियां लागू की जानी चाहिए।
27 देशों में मौजूदगी, 45 मिलियन किसानों तक पहुंच
IPL Biologicals Limited का दावा है कि वह वर्तमान में 8,000 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के माध्यम से 27 देशों में 4.5 करोड़ से अधिक किसानों तक अपने उत्पाद पहुंचा रही है।
कंपनी के पास फिलहाल 19 पेटेंट हैं, जबकि 37 अन्य पेटेंट आवेदन प्रक्रिया में हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी रिसर्च और इनोवेशन पर लगातार निवेश कर रही है, ताकि किसानों को नई और अधिक प्रभावी जैविक तकनीक उपलब्ध कराई जा सके।
युवराज सिंह बने ब्रांड एंबेसडर
इस अवसर पर भारतीय क्रिकेटर Yuvraj Singh भी मौजूद रहे, जो कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं।
उन्होंने कहा, “क्रिकेट और जिंदगी दोनों में असली ताकत मजबूत नींव से आती है। असली रिकवरी अंदर से होती है और इसी वजह से मैं मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाने के मिशन में IPL बायोलॉजिकल्स के साथ जुड़ा हूं।”
कार्यक्रम में सुरेश सोनी, पर्यावरणविद गोपाल आर्य, प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर भी शामिल हुए।
भारतीय कृषि में बदलाव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कृषि क्षेत्र अब धीरे-धीरे रासायनिक आधारित मॉडल से टिकाऊ और जैविक मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
मिट्टी की गिरती गुणवत्ता, बढ़ती लागत और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों ने किसानों को नए विकल्प तलाशने के लिए मजबूर किया है।
ऐसे समय में बायोलॉजिकल कृषि समाधान न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक मिट्टी स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
वडोदरा में शुरू हुई यह नई फैसिलिटी इसी बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

