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Home योजना

prakritik kheti yojana: प्राकृतिक खेती राष्ट्रीय मिशन: किसानों के लिए खेती का नया और टिकाऊ मॉडल

National Mission on Natural Farming: A new and sustainable model of farming for farmers

Fiza by Fiza
May 23, 2026
in योजना
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prakritik kheti yojana

prakritik kheti yojana

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prakritik kheti yojana: भारत में खेती लगातार बदलते मौसम, बढ़ती लागत और रासायनिक खादों पर बढ़ती निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने किसानों को कम लागत और सुरक्षित खेती की ओर बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य किसानों को ऐसी खेती से जोड़ना है जिसमें रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल कम हो और खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।

आज देश के कई किसान प्राकृतिक खेती अपनाकर लागत घटा रहे हैं और मिट्टी की उर्वरता बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि यह योजना धीरे-धीरे किसानों के बीच लोकप्रिय होती जा रही है। सरकार भी इस मिशन के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और आर्थिक सहयोग देकर किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित कर रही है।

क्या है prakritik kheti yojana?

प्राकृतिक खेती राष्ट्रीय मिशन एक ऐसी सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रेरित करना है। इस योजना में देसी गाय आधारित खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग और प्राकृतिक कीटनाशकों के उपयोग पर जोर दिया जाता है।

इस मिशन का मुख्य लक्ष्य खेती की लागत को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। साथ ही इससे मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

प्राकृतिक खेती में खेत की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलते हैं।

prakritik kheti yojana की शुरुआत कैसे हुई?

भारत सरकार ने खेती में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग और मिट्टी की खराब होती सेहत को देखते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया। इसी सोच के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक खेती मिशन को आगे बढ़ाया गया।

केंद्र सरकार ने कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए, जहाँ किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखाई गई। इसके बाद इस मिशन को बड़े स्तर पर लागू किया गया ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार बन सकती है। यही कारण है कि इसे जल संरक्षण, मिट्टी सुधार और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी योजनाओं के साथ भी जोड़ा जा रहा है।

प्राकृतिक खेती क्यों बन रही किसानों की पहली पसंद?

आज खेती की लागत तेजी से बढ़ रही है। यूरिया, डीएपी, कीटनाशक और डीजल के दाम बढ़ने से किसानों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों को कम लागत में खेती करने का विकल्प देती है।

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों का कहना है कि शुरुआत में थोड़ी मेहनत अधिक लगती है, लेकिन बाद में खेत की मिट्टी मजबूत होने लगती है और रासायनिक खादों की जरूरत कम हो जाती है।

इसके अलावा बाजार में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। कई शहरों में लोग रसायन मुक्त अनाज, फल और सब्जियों के लिए अधिक कीमत देने को तैयार हैं। इससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

किसानों को इस योजना का फायदा कैसे मिलेगा?

सरकार इस मिशन के तहत किसानों को कई तरह की सुविधाएँ देती है। किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे बिना रसायनों के खेती करना सीख सकें।

इसके अलावा किसानों को खेत पर डेमो, तकनीकी सहायता और प्राकृतिक खाद तैयार करने की जानकारी भी दी जाती है। कई राज्यों में किसानों को क्लस्टर आधारित खेती के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इस योजना के तहत मिलने वाले प्रमुख लाभ:

  • खेती की लागत में कमी
  • मिट्टी की उर्वरता में सुधार
  • रासायनिक खादों पर निर्भरता कम
  • सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन
  • पानी की बचत
  • पर्यावरण संरक्षण
  • बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना

प्राकृतिक खेती में किन तकनीकों का उपयोग होता है?

प्राकृतिक खेती केवल रासायनिक खाद छोड़ने तक सीमित नहीं है। इसमें कई पारंपरिक और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

जीवामृत

यह देसी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार किया जाता है। इसे मिट्टी में डालने से सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है।

घनजीवामृत

यह जीवामृत का ठोस रूप होता है जिसका उपयोग पौधों की वृद्धि बढ़ाने के लिए किया जाता है।

मल्चिंग

फसल अवशेषों से मिट्टी को ढकने की प्रक्रिया को मल्चिंग कहा जाता है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।

प्राकृतिक कीटनाशक

नीम, लहसुन, मिर्च और गौमूत्र से तैयार प्राकृतिक घोल का उपयोग कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है।

योजना के लिए किसान कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

प्राकृतिक खेती राष्ट्रीय मिशन का लाभ लेने के लिए किसान अपने राज्य के कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं। कई राज्यों में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।

रजिस्ट्रेशन की सामान्य प्रक्रिया

  1. किसान को अपने जिले के कृषि कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र जाना होगा।
  2. आवेदन फॉर्म भरना होगा।
  3. जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
  4. कृषि अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा।
  5. चयन होने पर किसान को प्रशिक्षण और योजना का लाभ दिया जाएगा।

कुछ राज्यों में पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन किए जा रहे हैं।

योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

प्राकृतिक खेती मिशन में आवेदन करने के लिए किसानों के पास कुछ जरूरी दस्तावेज होने चाहिए।

आवश्यक दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • बैंक खाता विवरण
  • पासबुक की कॉपी
  • मोबाइल नंबर
  • जमीन के कागजात
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • किसान पंजीकरण संख्या (यदि लागू हो)

किन राज्यों में किसान उठा सकते हैं योजना का लाभ?

प्राकृतिक खेती मिशन का लाभ देश के कई राज्यों में किसानों को दिया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों ने अपने स्तर पर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान शुरू किए हैं।

प्रमुख राज्य जहाँ योजना चल रही है

  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • गुजरात
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • महाराष्ट्र
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • राजस्थान
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • बिहार

इन राज्यों में किसानों को प्रशिक्षण, डेमो और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?

पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों की रुचि तेजी से बढ़ी है। कई राज्यों में हजारों किसानों ने प्राकृतिक खेती मॉडल अपनाया है।

किसानों को मिले प्रमुख फायदे

  • रासायनिक खाद पर खर्च कम हुआ
  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया
  • पानी की खपत कम हुई
  • उत्पादन लागत घटी
  • कई किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिला
  • जैविक उत्पादों की मांग बढ़ी

विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की आय में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसान समूह सीधे उपभोक्ताओं तक उत्पाद बेच रहे हैं।

प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन

आज जलवायु परिवर्तन खेती के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अनियमित बारिश, सूखा और बढ़ती गर्मी का असर फसलों पर साफ दिखाई दे रहा है। प्राकृतिक खेती मिट्टी की नमी बनाए रखने और खेत की जैविक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। इससे फसलें मौसम की मार को कुछ हद तक सहन कर पाती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में प्राकृतिक खेती खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

क्या प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम होता है?

यह सवाल अक्सर किसानों के मन में आता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती वर्षों में उत्पादन थोड़ा प्रभावित हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरने पर उत्पादन स्थिर होने लगता है। यदि किसान सही तकनीक, फसल चक्र और प्राकृतिक पोषण का उपयोग करें तो अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

प्राकृतिक खेती से जुड़े नए बाजार अवसर

आज शहरों में प्राकृतिक और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं और बिना रसायन वाले उत्पाद खरीदना पसंद कर रहे हैं। इससे किसानों के सामने नए बाजार खुल रहे हैं। कई किसान सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, किसान बाजार और एफपीओ के माध्यम से अपने उत्पाद बेच रहे हैं।

सरकार की भविष्य की तैयारी

सरकार आने वाले वर्षों में प्राकृतिक खेती का दायरा और बढ़ाना चाहती है। इसके लिए किसानों को आधुनिक प्रशिक्षण, डिजिटल सहायता और बाजार से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। कई राज्यों में स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल शुरू हो चुकी है।

निष्कर्ष

प्राकृतिक खेती राष्ट्रीय मिशन केवल एक योजना नहीं बल्कि खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बढ़ती लागत और मिट्टी की खराब होती सेहत के बीच यह मिशन किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।

यदि किसान सही प्रशिक्षण और वैज्ञानिक तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ खाद्य उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में प्राकृतिक खेती भारतीय कृषि की मजबूत पहचान बन सकती है और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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