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WBCIS Scheme: बदलते मौसम में किसानों की सुरक्षा कवच बनी सरकारी स्कीम

WBCIS Scheme: Government scheme becomes a safety shield for farmers in changing weather

Fiza by Fiza
May 25, 2026
in योजना
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WBCIS Scheme

WBCIS Scheme

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WBCIS Scheme: भारत में खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर मानी जाती है। कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवाएं या चक्रवात किसानों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। ऐसे हालात में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने कई बीमा योजनाएं शुरू कीं, जिनमें मौसम आधारित फसल बीमा योजना काफी अहम मानी जाती है। यह योजना खास तौर पर मौसम में होने वाले बदलावों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बनाई गई है।

आज के समय में जलवायु परिवर्तन और लगातार बदलते मौसम के कारण खेती का जोखिम पहले से ज्यादा बढ़ चुका है। ऐसे में किसानों के लिए फसल बीमा केवल विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। मौसम आधारित फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदा के दौरान आर्थिक सहारा देने का काम करती है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

क्या है WBCIS Scheme मौसम आधारित फसल बीमा योजना?

मौसम आधारित फसल बीमा योजना को अंग्रेजी में Weather Based Crop Insurance Scheme (WBCIS) कहा जाता है। इस योजना की शुरुआत किसानों को मौसम से होने वाले नुकसान से राहत देने के लिए की गई थी। इसमें फसल के नुकसान का आकलन खेत में जाकर नहीं बल्कि मौसम के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।

अगर किसी क्षेत्र में तय सीमा से कम बारिश होती है, अत्यधिक बारिश होती है, तापमान बहुत अधिक या कम हो जाता है, तेज हवा या नमी की वजह से फसल प्रभावित होती है, तो किसानों को बीमा राशि दी जाती है।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को मुआवजा पाने के लिए लंबी जांच प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ता। मौसम के रिकॉर्ड के आधार पर क्लेम तय हो जाता है।

WBCIS Scheme की शुरुआत कैसे हुई?

भारत सरकार ने किसानों को प्राकृतिक जोखिमों से बचाने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में मौसम आधारित फसल बीमा योजना शुरू की थी। बाद में इसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के साथ भी जोड़ा गया और कई राज्यों में दोनों योजनाओं को मिलाकर लागू किया गया।

सरकार का उद्देश्य था कि किसानों को ऐसी बीमा सुविधा मिले जिसमें नुकसान का आकलन तेजी से हो और भुगतान समय पर मिले। पारंपरिक फसल बीमा योजनाओं में सर्वे और जांच में लंबा समय लग जाता था, जबकि WBCIS में मौसम डेटा के आधार पर सीधे बीमा क्लेम जारी किया जाता है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं से सुरक्षा देना है। इसके अलावा योजना के कुछ प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • किसानों की आय को सुरक्षित करना
  • प्राकृतिक आपदा के समय आर्थिक मदद देना
  • खेती में जोखिम कम करना
  • किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना
  • कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना

किन मौसम स्थितियों पर मिलता है बीमा?

मौसम आधारित फसल बीमा योजना में कई तरह की मौसम परिस्थितियों को शामिल किया जाता है। इनमें शामिल हैं:

कम बारिश या सूखा

यदि तय अवधि में सामान्य से कम बारिश होती है और फसल प्रभावित होती है तो बीमा राशि मिलती है।

अत्यधिक बारिश

अत्यधिक वर्षा की वजह से खेतों में जलभराव होने पर भी किसान क्लेम प्राप्त कर सकते हैं।

ओलावृष्टि

ओलावृष्टि से फसल खराब होने पर योजना के तहत मुआवजा मिलता है।

तापमान में बदलाव

अत्यधिक गर्मी या ठंड से फसल प्रभावित होने पर भी बीमा कवर मिलता है।

तेज हवा और तूफान

कई राज्यों में तेज हवाओं और चक्रवात को भी योजना में शामिल किया गया है।

किसान इस योजना का फायदा कैसे उठाएँ?

किसानों को योजना का लाभ उठाने के लिए समय पर आवेदन करना जरूरी होता है। किसान निम्न तरीकों से योजना में शामिल हो सकते हैं:

बैंक के माध्यम से

यदि किसान ने फसल ऋण लिया है तो कई मामलों में बीमा स्वतः लागू हो जाता है।

CSC सेंटर के जरिए

कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC पर जाकर किसान आवेदन कर सकते हैं।

ऑनलाइन पोर्टल

राज्य सरकार और कृषि विभाग की वेबसाइटों पर भी आवेदन की सुविधा दी जाती है।

बीमा कंपनी के कार्यालय

किसान सीधे अधिकृत बीमा कंपनी के कार्यालय में जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया क्या है?

योजना में आवेदन की प्रक्रिया काफी आसान बनाई गई है ताकि छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से जुड़ सकें।

आवेदन करने की प्रक्रिया

  1. किसान को नजदीकी बैंक, CSC सेंटर या कृषि विभाग कार्यालय जाना होगा।
  2. आवेदन फॉर्म भरना होगा।
  3. जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
  4. फसल और भूमि की जानकारी देनी होगी।
  5. प्रीमियम राशि जमा करनी होगी।
  6. आवेदन सफल होने पर बीमा पॉलिसी जारी कर दी जाती है।

योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

किसानों के पास निम्न दस्तावेज होना जरूरी है:

  • आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक
  • भूमि रिकॉर्ड या खतौनी
  • बोई गई फसल की जानकारी
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • किसान पंजीकरण नंबर (कुछ राज्यों में आवश्यक)

किसानों को कितना प्रीमियम देना पड़ता है?

योजना में किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है क्योंकि बाकी राशि सरकार देती है।

आमतौर पर:

  • खरीफ फसल के लिए लगभग 2 प्रतिशत
  • रबी फसल के लिए लगभग 1.5 प्रतिशत
  • बागवानी और व्यावसायिक फसलों के लिए लगभग 5 प्रतिशत प्रीमियम लिया जाता है।

बाकी राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं।

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?

पिछले कुछ वर्षों में मौसम आधारित फसल बीमा योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है। लाखों किसानों ने इसका लाभ उठाया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार करोड़ों किसानों का बीमा किया गया और हजारों करोड़ रुपये का क्लेम भुगतान किया गया।

किसानों को मिले प्रमुख फायदे

  • प्राकृतिक आपदा के बाद आर्थिक राहत
  • खेती जारी रखने में मदद
  • कर्ज का दबाव कम हुआ
  • छोटे किसानों को सुरक्षा मिली
  • आधुनिक खेती अपनाने का भरोसा बढ़ा

कई राज्यों में सूखा और बाढ़ जैसी परिस्थितियों के दौरान किसानों को बड़ी राहत राशि दी गई। विशेष रूप से महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों को क्लेम मिला।

कौन-कौन से राज्यों में लागू है योजना?

मौसम आधारित फसल बीमा योजना देश के कई राज्यों में लागू की गई है। राज्य अपनी जरूरत के अनुसार फसल और मौसम जोखिम तय करते हैं।

इन राज्यों में योजना का लाभ प्रमुख रूप से मिलता है:

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल
  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़

किन फसलों को शामिल किया जाता है?

राज्य सरकारों द्वारा अलग-अलग फसलों को योजना में शामिल किया जाता है। आमतौर पर इन फसलों को कवर किया जाता है:

खाद्यान्न फसलें

  • गेहूं
  • धान
  • मक्का
  • बाजरा
  • ज्वार

दलहन फसलें

  • चना
  • अरहर
  • उड़द
  • मूंग

तिलहन फसलें

  • सरसों
  • सोयाबीन
  • मूंगफली

बागवानी फसलें

  • प्याज
  • आलू
  • टमाटर
  • केला
  • आम

योजना में क्लेम कैसे मिलता है?

इस योजना में मौसम विभाग के आंकड़ों के आधार पर क्लेम तय किया जाता है। यदि किसी क्षेत्र में मौसम तय मानकों से बाहर चला जाता है तो बीमा कंपनी स्वतः भुगतान प्रक्रिया शुरू करती है।

क्लेम प्रक्रिया

  • मौसम डेटा का विश्लेषण
  • तय सीमा से तुलना
  • नुकसान की गणना
  • किसानों के खाते में DBT के जरिए भुगतान

इस प्रक्रिया में पारंपरिक सर्वे की जरूरत कम पड़ती है, जिससे भुगतान अपेक्षाकृत जल्दी हो जाता है।

किसानों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?

हालांकि योजना किसानों के लिए फायदेमंद है, लेकिन कई जगह किसानों को कुछ समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।

जागरूकता की कमी

कई किसानों को योजना की पूरी जानकारी नहीं होती।

क्लेम में देरी

कुछ मामलों में भुगतान में समय लग जाता है।

तकनीकी दिक्कतें

ऑनलाइन आवेदन और रिकॉर्ड अपडेट में दिक्कतें आती हैं।

सीमित कवरेज

कुछ क्षेत्रों में सभी फसलें शामिल नहीं होतीं।

सरकार क्या सुधार कर रही है?

सरकार लगातार योजना को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।

डिजिटल सिस्टम

अब आवेदन और क्लेम प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा रहा है।

मौसम केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही

अधिक सटीक डेटा के लिए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाए जा रहे हैं।

DBT भुगतान

सीधे बैंक खाते में भुगतान भेजा जा रहा है।

किसानों को जागरूक करना

कृषि विभाग और CSC केंद्रों के जरिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

बदलते मौसम में क्यों जरूरी है फसल बीमा?

आज खेती सबसे ज्यादा जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रही है। समय पर बारिश नहीं होना, अचानक तापमान बढ़ना, ओलावृष्टि और चक्रवात जैसी घटनाएं किसानों की लागत और उत्पादन दोनों को प्रभावित करती हैं।

ऐसे समय में मौसम आधारित फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। यह योजना किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और खेती में भरोसा बनाए रखने में मदद करती है।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी राहत

भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। उनके पास सीमित जमीन और कम संसाधन होते हैं। यदि एक सीजन की फसल खराब हो जाए तो आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। मौसम आधारित फसल बीमा योजना ऐसे किसानों को जोखिम से बचाने का काम करती है। कम प्रीमियम में बीमा सुरक्षा मिलने से किसान खेती में निवेश करने के लिए प्रेरित होते हैं।

भविष्य में योजना की संभावनाएँ

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मौसम आधारित बीमा योजनाओं की जरूरत और बढ़ेगी। सरकार यदि अधिक पारदर्शिता, तेज क्लेम भुगतान और बेहतर तकनीक पर काम करे तो यह योजना किसानों के लिए और प्रभावी बन सकती है। ड्रोन, सैटेलाइट डेटा और AI आधारित मौसम विश्लेषण जैसी तकनीकों के जुड़ने से भविष्य में बीमा प्रक्रिया और सटीक होने की संभावना है।

निष्कर्ष

मौसम आधारित फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा योजना बनकर उभरी है। प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम के दौर में यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का काम कर रही है। कम प्रीमियम, आसान आवेदन प्रक्रिया और मौसम आधारित क्लेम सिस्टम इसकी बड़ी खासियत हैं।

हालांकि अभी भी जागरूकता और भुगतान से जुड़ी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन सही जानकारी और समय पर आवेदन के जरिए किसान इस योजना का बड़ा लाभ उठा सकते हैं। आने वाले समय में यह योजना भारतीय कृषि को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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